सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण में रिक्त पदों को भरने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य से जवाब मांगा है। न्यायालय ने सोमवार को केंद्र को निर्देश दिया कि वह समयबद्ध तरीके से चयन प्रक्रिया पूरी कर रिक्त पदों को भरे।
रिक्तियां नहीं भरने पर काम में आ सकती है बाधा
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की। पीठ ने महान्यायवादी आर वेंकटरमणी को इस मामले में सहायता करने को कहा। याचिकाकर्ता, सशस्त्र बल न्यायाधिकरण बार एसोसिएशन (क्षेत्रीय पीठ) के वकील को याचिका की प्रति महान्यायवादी के कार्यालय को सौंपने का निर्देश दिया गया। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की गई है। याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ को बताया कि सशस्त्र बल न्यायाधिकरण की कुल 11 पीठें हैं। यदि रिक्तियां नहीं भरी गईं, तो वर्ष के अंत तक केवल तीन ही कार्यरत रह पाएंगी।
याचिका की मुख्य मांगें
याचिका में केंद्र को सशस्त्र बल न्यायाधिकरण अधिनियम, 2007 की धारा पांच का पालन करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इस धारा के तहत समयबद्ध तरीके से रिक्तियों को भरा जाना है। यह धारा न्यायाधिकरण और उसकी पीठों की संरचना से संबंधित है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि न्यायाधिकरण के वर्तमान न्यायिक और प्रशासनिक सदस्य पद पर बने रहें। वे अपनी सहमति के अधीन तब तक पद पर रह सकते हैं जब तक आवश्यक नियुक्तियां नहीं हो जातीं।