सुप्रीम कोर्ट ने असम में नेशनल रजिस्ट्रर ऑफ सिटिजंस(एनआरसी) के अंतिम मसौदे से बाहर हुए 40 लाख लोगों की आपत्तियों और दावों पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा तैयार स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर(एसओपी) पर विभिन्न हितधारकों का विचार लेने के लिए कहा है। हालांकि शीर्ष अदालत ने राजनीतिक दलों को हितधारक मानने से इनकार कर दिया है।
न्यायमूर्ति रंजन गोगई और न्यायमूर्ति रोहिंग्टन एफ नरीमन की पीठ ने एसओपी पर जनहित याचिकाकर्ता एनजीओ असम पब्लिक वक्र्स सहित अखिल असम छात्र यूनियन, ऑल मॉइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन और असम राज्य जमात उलेमा ए हिंद को अपना विचार देने के लिए कहा है। सभी को 25 अगस्त तक अपना विचार रखने के लिए कहा गया है।
हालांकि पीठ ने इस मामले को राजनीतिक दलों को हितधारक मानने से इनकार कर दिया है। यानी एसओपी पर राजनीतिक दलों से विचार नहीं रखने को कहा जाएगा। इसके अलावा पीठ ने एनआरसी कॉर्डिनेटर प्रतीक हजेला को यह बताने के लिए कहा है कि एनसीआर केअंतिम मसौदे से बाहर हुए लोग जिले की जनसंख्या का कितना फीसदी हैं।
हजेला को सीलबंद लिफाफे में जिलावार यह आकड़ा देने के लिए कहा गया है। साथ ही पंचायत स्तर पर एनआरसी का रिकॉर्ड भी पेश करने केलिए कहा है जिससे कि अंतिम मसौदे से बाहर हुए लोग अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकें। पीठ ने 30 अगस्त से लोगों केदावों और आपत्तियां स्वीकार करने से प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी।
मालूम हो कि गत 30 जुलाई को जारी असम में एनआरसी के अंतिम मसौदे में 2.89 करोड़ लोग को योग्य ठहराया गया था जबकि इस मसौदे में 40.07 लाख लोगों के नाम नहीं थे।