हर तरह की समस्या के समाधान के लिए अदालत का रुख करने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है हर मर्ज की इलाज हमारे पास नहीं हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि हमें अमृत-धारा न समझा जाए। शीर्ष अदालत ने जनहित याचिकाओं दायर करने की होड़ पर चिंता जताई है।
जनहित याचिकाओं के अंबार से आहत चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि हमारे पास हर मर्ज की दवा नहीं है। चीफ जस्टिस ने कहा कि हमारे पास कोई अमृत धारा नहीं है, जिससे तमाम समस्या हल जो जाए। वास्तव में पीठ ने लोगों तक यह सेदेश पहुंचाने की कोशिश की है कि वे फिजूल की जनहित याचिका दाखिल न करें।
पीठ ने कहा ‘ऐसा लगता है कि लोग सुबह उठते हैं और कहते है कि चलो सुप्रीम कोर्ट चलते हैं।’ पीठ ने कहा कि लोग याचिका दाखिल करने से पहले संबंधित विभाग या मंत्रालय के पास क्यों नहीं जाते। अदालत ने ये टिप्पणी जया ठाकुर नामक व्यक्ति द्वारा एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिका में शवों को गरिमापूर्ण तरीके से श्मशान पहुंचाने और धार्मिक रीति रिवाज के तहत दाहसंस्कार कराने की गुहार लगाई गई थी।