सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हाईकोर्ट से यथास्थिति के आदेश की आड़ में वन मंजूरी (अधिकारियों से) लिए बिना खनन कैसे जारी रखा जा सकता है। बिना वन मंजूरी के जो भी खोदाई की गई है वह अवैध है।
सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा में कुछ फर्मों द्वारा यथास्थिति आदेशों की आड़ में वन मंजूरी (एफसी) के बिना जारी अवैध खनन पर कड़ी नाराजगी जताई। साथ ही शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट को छह महीने के भीतर इस तरह के सभी मामलों का निपटारा करने का निर्देश दिया।
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जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अवकाश पीठ ने पूछा, हाईकोर्ट से यथास्थिति के आदेश की आड़ में वन मंजूरी (अधिकारियों से) लिए बिना खनन कैसे जारी रखा जा सकता है। बिना वन मंजूरी के जो भी खोदाई की गई है वह अवैध है। आपको वन मंजूरी के बिना खनिजों की खोदाई या निष्कर्षण जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। पीठ ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हाईकोर्ट यथास्थिति के ऐसे आदेश पारित कर रहे हैं और खनन कार्य को जारी रखने की अनुमति दे रहे हैं।
पीठ ने ओडिशा के मेसर्स बालासोर अलॉयज लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। इस कंपनी ने अपने पक्ष में यथास्थिति के आदेश को जारी रखने से उच्च न्यायालय के इनकार करने के खिलाफ याचिका दायर की थी।
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पीठ ने कहा, हमने...वकील को सुना है। विवाद यह नहीं है कि याचिकाकर्ता के पास इस स्तर पर वन मंजूरी नहीं है। केवल इसलिए कि वन मंजूरी के लिए आवेदन लंबित है, इसे वन मंजूरी प्राप्त करने के लिए याचिकाकर्ता को खनन गतिविधियों को जारी रखने की अनुमति के रूप में नहीं माना जा सकता है। इस आदेश से पहले हम हाईकोर्ट को हर हाल में छह महीने के भीतर इस तरह की सभी लंबित मामलों का निपटारा करने का निर्देश देते हैं। पीठ ने रजिस्ट्री से ओडिशा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को इस आदेश से अवगत कराने का निर्देश दिया।