सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में शराब की बिक्री के लिए जिम्मेदार सरकारी निगम TASMAC के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की जा रही जांच पर रोक लगा दी है। TASMAC परिसरों पर ED की छापेमारी को चुनौती देने वाली तमिलनाडु सरकार की याचिका के जवाब में यह रोक लगाई गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने ED को एक नोटिस भी जारी किया है। इस नोटिस में कहा गया कि संघीय एजेंसी अपनी कार्रवाइयों में 'सभी सीमाओं को पार करती हुई' दिख रही है।
साथ ही शीर्ष कोर्ट ने ईडी से यह भी कहा कि प्रवर्तन निदेशालय संघीय सिद्धांत का उल्लंघन कर रहा है। वह TASMAC पर कैसे छापा मार सकता है।
बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के आदेश में संशोधन की मांग को लेकर याचिका दायर
सुप्रीम कोर्ट में मथुरा में श्री बांके बिहारी मंदिर के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की प्रस्तावित पुनर्विकास योजना को मंजूरी देने संबंधी शीर्ष अदालत के आदेश में संशोधन किये जाने का अनुरोध करते हुए याचिका दायर की गई है। उच्चतम न्यायालय ने 15 मई को मथुरा में श्री बांके बिहारी मंदिर गलियारे को विकसित करने की उत्तर प्रदेश सरकार की योजना का मार्ग प्रशस्त कर दिया था। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार की उस याचिका को स्वीकार कर लिया था जिसमें कहा गया था कि श्री बांके बिहारी मंदिर की निधि का इस्तेमाल केवल मंदिर के आसपास पांच एकड़ भूमि खरीदने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बनाये गये निरुद्ध क्षेत्र (होल्डिंग एरिया) बनाने के लिए किया जाए।
देवेंद्र नाथ गोस्वामी ने 19 मई को एक याचिका दायर की और कहा कि प्रस्तावित पुनर्विकास परियोजना का कार्यान्वयन अव्यावहारिक है और मंदिर के कामकाज से ऐतिहासिक और परिचालन रूप से जुड़े लोगों की भागीदारी के बिना मंदिर परिसर के पुनर्विकास का कोई भी प्रयास प्रशासनिक अराजकता का कारण बन सकता है। इस तरह के पुनर्विकास से मंदिर और उसके आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक चरित्र के बदलने की आशंका है, जिसका गहरा ऐतिहासिक और भक्ति संबंधी महत्व है। याचिकाकर्ता ने कहा कि वह मंदिर के दैनिक धार्मिक और प्रशासनिक मामलों के प्रबंधन में सक्रिय रूप से शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के झुडपी जंगल को घोषित किया वन भूमि
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के पूर्वी विदर्भ क्षेत्र में स्थित झुडपी जंगल को बृहस्पतिवार को 1996 के अपने फैसले के अनुरूप वन भूमि घोषित कर दिया। अदालत ने यहां जमीन पर दशकों से मौजूद संरचनाओं को भी संरक्षित कर दिया। प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि ‘झुडपी’ एक मराठी शब्द है, जिसका मतलब ‘झाड़ियां’ है और ‘झुडपी’ भूमि का मतलब निम्न श्रेणी की झाड़ीदार खाली भूमि है। पीठ नागपुर, वर्धा, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर और गढ़चिरौली जिलों में वन भूमि के दर्जे से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने आदेश दिया कि वनरोपण के लिए गैर-वन भूमि की अनुपलब्धता के संबंध में राज्य के मुख्य सचिव का प्रमाणपत्र न होने तक झुडपी जंगल भूमि का प्रतिपूरक वनरोपण के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।