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Supreme Court: शृंगेरी सीट पर दोबारा मतगणना पर रोक, BJP नेता की विधायकी गई, कांग्रेस को मिली जीत; जानें मामला

Mon, 11 May 2026 08:16 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की शृंगेरी सीट पर हुई वोटों की दोबारा गिनती पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद विधायक बने भाजपा नेता डीएन जीवराज को हटाकर कांग्रेस के टीडी राज गौड़ा को फिर से विधायक मान लिया गया है। कोर्ट ने पाया कि चुनाव अधिकारी ने गलत तरीके से पहले से मान्य पोस्टल बैलेट की दोबारा गिनती की। अगली सुनवाई 21 मई को होगी। आइए, विस्तार से पूरे मामले को समझते हैं...

 

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सु्प्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कर्नाटक के शृंगेरी विधानसभा क्षेत्र के चुनावी नतीजे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बहुत ही बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने इस सीट पर हाल ही में हुई वोटों की दोबारा गिनती (रीकाउंटिंग) के नतीजों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद भाजपा के नेता डीएन जीवराज को बड़ा झटका लगा है, जिन्होंने दोबारा गिनती के बाद हाल ही में विधायक पद की शपथ ली थी। सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त आदेश के बाद कांग्रेस के नेता टीडी राज गौड़ा को एक बार फिर से इस सीट का असली विधायक मान लिया गया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि दोबारा गिनती से पहले जो स्थिति थी, उसे ही फिर से बहाल किया जाए। यह खबर कर्नाटक की राजनीति में एक बड़ा बदलाव लेकर आई है और इससे पूरी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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दरअसल, यह पूरा विवाद शृंगेरी विधानसभा सीट पर साल 2023 में हुए चुनाव से जुड़ा है। चुनाव में पहले कांग्रेस के टीडी राज गौड़ा को जीत मिली थी, लेकिन भाजपा के उम्मीदवार डीएन जीवराज ने इस नतीजे को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। करीब तीन साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अप्रैल 2026 में हाईकोर्ट ने पोस्टल बैलेट (डाक मतपत्रों) की दोबारा गिनती करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 2 मई 2026 को वोटों की गिनती हुई, जिसमें टीडी राज गौड़ा के पक्ष में पड़े कई वोटों को अमान्य (रद्द) कर दिया गया। इस गिनती के बाद 3 मई 2026 को भाजपा के डीएन जीवराज को 52 वोटों के अंतर से जीता हुआ घोषित कर दिया गया। इसी पूरी प्रक्रिया और चुनाव अधिकारी के काम के खिलाफ कांग्रेस नेता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां से उन्हें अब बड़ी राहत मिली है।

टीडी राज गौड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी?
सुप्रीम कोर्ट में अपनी अपील दायर करते हुए कांग्रेस नेता टीडी राज गौड़ा ने चुनाव अधिकारी (रिटर्निंग ऑफिसर) की पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने अदालत को बताया कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने केवल उन 279 पोस्टल बैलेट को दोबारा जांचने का आदेश दिया था, जिन्हें पहले खारिज कर दिया गया था। लेकिन, चुनाव अधिकारी ने अपनी हद पार करते हुए उन 562 पोस्टल बैलेट की भी दोबारा गिनती कर दी, जो पूरी तरह से वैध (सही) थे और जो राज गौड़ा के पक्ष में पड़े थे। अधिकारी ने राज गौड़ा के 562 वैध वोटों में से 248 वोट घटा दिए और भाजपा के जीवराज के पहले से मिले 689 वोटों में 2 वोट और जोड़ दिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि इसी हेराफेरी के आधार पर भाजपा नेता को जीता हुआ घोषित कर दिया गया, जो कि पूरी तरह से अवैध था।
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सुप्रीम कोर्ट के जजों ने मामले पर क्या सख्त टिप्पणी की?
इस पूरे मामले की सुनवाई जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच कर रही थी। अदालत ने कांग्रेस नेता की दलीलों को सही माना और चुनाव अधिकारी के काम को पहली नजर में ही गलत ठहरा दिया। जजों ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जो पोस्टल बैलेट पहले ही वैध (सही) साबित हो चुके हैं, उनकी दोबारा जांच करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है। अदालत ने साफ कहा कि चुनाव अधिकारी ने आदेश से बाहर जाकर काम किया है और ऐसे बिना आधार वाले कदमों में अदालत का दखल देना बहुत जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि जब तक इस अपील पर कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक दोबारा गिनती के आधार पर लिए गए सभी फैसलों पर रोक रहेगी और पुरानी स्थिति ही लागू रहेगी।

भाजपा नेता के वकील की दलील पर कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान भाजपा नेता डीएन जीवराज के वरिष्ठ वकील वी गिरी ने सुप्रीम कोर्ट के इस रोक वाले आदेश का कड़ा विरोध किया। लेकिन, बेंच उनकी किसी भी दलील से सहमत नहीं हुई। जस्टिस संजय कुमार ने सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा कि सिर्फ इसलिए पुरानी स्थिति को नहीं बदला जा सकता क्योंकि दोबारा गिनती के बाद आगे के कदम (शपथ ग्रहण आदि) उठा लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जो गलत हुआ है, उसे पलटना ही होगा। जज ने यह भी कहा कि जब पूरी प्रक्रिया के साथ ही खिलवाड़ किया गया है, तो अदालत कुछ नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 मई की तारीख तय की है।
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भाजपा नेता डीएन जीवराज पर क्या गंभीर आरोप लगे?
इस चुनावी विवाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अलावा भाजपा नेता डीएन जीवराज की मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं। शृंगेरी विधानसभा क्षेत्र में वोटों की दोबारा गिनती के दौरान बैलेट बॉक्स (मतपेटी) के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ करने के आरोप में जीवराज के खिलाफ एक एफआईआर (FIR) भी दर्ज की गई है। उन पर आरोप है कि उन्होंने चुनाव के नतीजों को अपने पक्ष में करने के लिए मतपेटियों के साथ गड़बड़ी की है। यह पूरा मामला अब एक नया मोड़ ले चुका है और सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद कांग्रेस खेमे में खुशी की लहर है, जबकि भाजपा को कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर भारी नुकसान उठाना पड़ा है।


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