सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के समाजवादी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को बड़ी राहत दी है। अदालत ने रामचरितमानस पर विवादित टिप्पणी मामले में मौर्य के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही चलाने पर रोक लगा दी है। मानस की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने की है। अवधि भाषा का यह पवित्र ग्रंथ भगवान श्रीराम से जुड़ा है।
समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य पर हिंदुओं की आस्था को आहत करने का आरोप है। इसी बीच रामचरितमानस पर विवादित टिप्पणी के बाद कठोर अदालती कार्यवाही की आशंका से घिरे मौर्य को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को मौर्य के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सवाल किया कि यह इतना संवेदनशील मुद्दा क्यों है, जिसमें बयान के आधार पर आपराधिक कार्यवाही की अपील की जा रही है।
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हाईकोर्ट से मिली निराशा के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे सपा नेता
शीर्ष अदालत की खंडपीठ ने गुरुवार को सुनवाई के बाद नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ की अदालत में लंबित कार्यवाही को रद्द करने के मामले में सवाल भी पूछा। मौर्य ने सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने 31 अक्तूबर, 2023 को मौर्य की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने प्रतापगढ़ की कार्यवाही को रद्द करने की अपील की थी।
सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने यूपी सरकार से पूछे कठिन सवाल
जस्टिस गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने यूपी सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे वकील से पूछा, 'यह इतना संवेदनशील क्यों है? यह कैसा अपराध है? मुद्दे की व्याख्या जरूरी है।' अदालत ने जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मौर्य के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश पारित किया।
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मौर्य के मामले में पारित आदेश इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल ही में भगवान राम को समर्पित मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई है। सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले मौर्य ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में अपने खिलाफ दायर आरोप पत्र के साथ-साथ निचली अदालत की तरफ से जारी समन को चुनौती दी थी। कोर्ट ने उन्हें पेश होने का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय में 31 अक्टूबर, 2023 को याचिका खारिज होने से पहले मौर्य के खिलाफ प्रतापगढ़ जिले के स्थानीय निवासी संतोष कुमार मिश्रा ने शिकायत दर्ज कराई थी।
प्रतापगढ़ में दर्ज शिकायत के आधार पर मौर्य और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यूपी पुलिस ने मौर्य और अन्य के खिलाफ निचली अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया, जिसके आधार पर अदालत में पेशी के लिए समन जारी किया गया। मौर्य का दावा किया है कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं। हिंदू धार्मिक ग्रंथ की निंदा के आरोप की पुष्टि न होने का दावा करते हुए मौर्य आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं।