पीठ ने कहा कि यह जानते हुए कि पूर्व में उसकी अपील खारिज हो चुकी है सरकार ने नए सिरे से अपील दायर की। पीठ ने कहा कि इससे भी दुखद बात यह है कि सरकार ने अपील वापस करने की बजाए मामले की पैरवी के लिए 10 वकीलों को रखा। इनमें एक एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और एक वरिष्ठ वकील भी थे।
पीठ ने कहा 'उस अपील जिसके भविष्य में बारे में अनुमान सहज लगाया जा सकता है, उस अपील की पैरवी के लिए इतनी संख्या में वकीलों की सेवा ली गई। ऐसा कर सरकार अपनी जिम्मेदारी बढ़ा रही है और करदाताओं को इसका वहन करने के लिए कह रही है जबकि इस 'बला’ से बचा भी जा सकता है। क्या इस बारे में सोचा गया।’
यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से भारत सरकार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। पीठ ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि एक न एक दिन भारत सरकार को यह बात जरूर समझ में आएगी कि अर्थपूर्ण और यथार्तपूर्ण नेशनल लिटिगेशन पॉलिशी बनाई जाए। अगर इसका सही से क्रियान्वयन किया गया तो वादियों को बहुत फायदा होगा।
पीठ ने पाया कि आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, नेशनल लिटिगेशन पॉलिशी, 2010 पर पुनीक्षण करने का निर्णय लिया गया था और नेशनल लिटिगेशन पॉलिशी, 2015 के संरूपण पर विचार किया जा रहा है। पीठ ने कहा कि आठ वर्षों से इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। पीठ ने कहा कि पता नहीं यह काम कब पूरा होगा।