फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्यों छोड़ा स्कूल, बताएगा आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस

Sun, 29 Apr 2018 12:12 AM IST
हरेन्द्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन

शिक्षा का अधिकार सभी छात्रों को है। लेकिन कई ऐसे स्टूडेंट्स होते हैं जो पारिवारिक, आर्थिक या बीमारी की वजह से स्कूल जारी नहीं रख पाते और नतीजतन उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ता है। सरकार का थिंक-टैंक नीति आयोग जल्द ही माइक्रोसॉफ्ट के साथ एक खास प्रोजेक्ट के लिए हाथ मिलाने की तैयारी कर रहा है, जिससे यह पता चलेगा कि बच्चे स्कूल क्यों छोड़ना चाहते हैं।

विज्ञापन


नीति आयोग के इस प्रोजेक्ट के तहत माइक्रोसॉफ्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (आईए) की मदद से उन बच्चों का पता लगाने में मदद करेगा कि वे स्कूल क्यों छोड़ना चाहते हैं। 

नीति आयोग का यह प्रोजेक्ट उस विजन डॉक्यूमेंट का हिस्सा है, जो उन हिस्सों का पता लगाने में रोडमैप तैयार करेगा, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (आईए) की मदद ली जा सकती है। नीति आयोग ने ऐसे पांच सेक्टर्स की पहचान की है, एजुकेशन, एग्रीकल्चर, हेल्थ, स्मार्ट सिटीज और स्किलिंग, जहां इसका संभावित इस्तेमाल किया जा सकता है।

विज्ञापन

आंध्र प्रदेश सरकार ने लागू किया पहला प्रोजेक्ट

माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले साल नीति आयोग के समक्ष प्रेजेंटेशन दिया था कि कैसे आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस स्कूल ड्राप आउट्स की पहचान करने और उसकी वजह जानने में मदद कर सकता है। 

गौरतलब है कि माइक्रोसॉफ्ट इससे पहले आंध्र प्रदेश में इस पायलेट प्रोजेक्ट पर काम कर चुका है। इस प्रोजेक्ट के तहत आंध्र प्रदेश सरकार ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ मिल कर 10वीं कक्षा के 6.50 लाख स्टूडेंट्स और उनकी सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि, स्कूल टीचर्स और स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर का डाटा एकत्र किया। जिसके बाद अब राज्य सरकार ने माइक्रोसॉफ्ट से सभी क्लासेज के लिए डाटा एकत्र करने का आदेश दिया है, जिसके जरिए स्टूडेंस् पर 360 डिग्री नजर रखी जा सकेगी। इस प्रोजेक्ट की सफलता की बात करें, तो इसके बाद ड्रॉप आउट्स में 90 फीसदी की कमी आई है।

ड्रॉप आउट्स को कैसे रोकेगा आईए?

आंध्र प्रदेश में स्कूल ड्रॉप आउट्स का पता लगाने के लिए माइक्रोसॉफ्ट की क्लाउड बेस्ड प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स सर्विस और अजूरे मशीन लर्निंग की मदद से उन स्टूडेंट्स का पता लगाया जाता है, जिन स्टूडेंट्स के स्कूल छोड़ने का खतरा सर्वाधिक है। 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए मनुष्य सॉफ्टवेयर के साथ संवाद कर सकते हैं। जैसे कोई बच्चा 3 दिन तक पारिवारिक वजहों से स्कूल नहीं आता है, तो एआई सॉफ्टवेयर पहले पूरे शैक्षिक सत्र को स्कैन करके बताएगा कि वह कितने दिन अनुपस्थित रहा। 

इसके बाद अनुपस्थित रहने के कारणों मसलन बीमारी, पारिवारिक या किसी वजह का पता लगाएगा, साथ ही यह भी बताएगा कि लगातार कितने दिन की छुट्टी बच्चे ने ली। साथ ही सॉफ्टवेयर यह भी बताएगा कि पिछले पूरे सत्रों में क्लास में उसकी परफॉरमेंस कैसे थी। 

इसके बाद ऐसे बच्चे को खोज कर क्लास टीचर और काउंसलर के लिए जरिए उसकी काउंसलिंग कराई जाएगी और उसके घरेलू हालात के बारे में जानकारी ली जाएगी और ड्रॉप आउट की संभावित वजहों का पता लगाना आसान हो जाएगा। साथ ही, सिस्टम यह भी बताएगा कि बच्चा किसी विषय में कमजोर तो नहीं है, ऐसा में साफ्टवेयर उस विषय के लिए एक्स्ट्रा क्लासेज के लिए भी सिफारिश करेगा और तब तक उस पर नजर रखेगा, जब तक कि उसकी परफॉरमेंस अन्य बच्चों के जैसी नहीं हो जाती।

सूत्रों के मुताबिक नीति आयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर राष्ट्रीय रणनीति के तहत माइक्रोसाफ्ट से स्कूल छोड़ने वाले स्डूडेंट्स का पता लगाने पर बातचीत कर रहा है। नीति आयोग का मानना है कि मामला सिर्फ ड्रॉप आउट्स तक सीमित नहीं है, स्कूल छोड़ने के पीछे कौन-कौन सी वजह हैं, इसका पता लगाना बेहद जरूरी है।
विज्ञापन

क्लास 9 में स्कूल ड्रॉप आउट सबसे ज्यादा

Prakash Javadekar
लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया था कि कक्षा 9 में नो-डिटेंशन पॉलिसी के चलते स्कूल ड्रॉप आउट्स की संख्या सबसे ज्यादा है। क्योंकि यहां उन्हें 10वीं कक्षा में पहुंचने के लिए मेहनत करनी पड़ती है और कक्षा 5वीं से 8वीं तक वे बिना मेहनत किए पहुंच जाते हैं। 

जावड़ेकर के मुताबिक 2014-15 में प्राइमरी लेवल पर ड्रॉप आउट्स की संख्या 4.13 फीसदी है, जबकि इसी अवधि में प्राइमरी लेवल पर लड़कों की ड्रॉप आउट संख्या 4.36 परसेंट और लड़कियों की 3.88 परसेंट थी। वहीं सेकेंडरी लेवल पर स्कूल ड्रॉप आउट्स की संख्या 17.6 परसेंट थी।

क्या है नो-डिटेंशन पॉलिसी

शिक्षा के अधिकार अधिनियम (2009) के तहत सेक्शन-16 में नो-डिटेंशन पॉलिसी को वर्ष 2010 में लागू किया गया था। जिसके तहत अगर कोई छात्र परीक्षा में फेल होता है तो उसे आठवीं कक्षा तक प्रमोट किया जाता है। 

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 6 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रावधान है। अधिनियम में यह है कि बच्चों को आठवीं तक किसी कक्षा में फेल न कर प्राप्तांक कम भी हैं, तो उसे पासिंग ग्रेड देकर अगली कक्षा में भेज दिया जाये। हालांकि सरकार ने इसमें खामियां बताते हुए इसे बदलने की कवायद शुरू कर दी है।

माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स भी थे ड्रॉप आउट

माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स, एपल के फाउंडर स्टीव जॉब्स समेत फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग भी कॉलेज ड्रॉप आउट रहे हैं। बिल गेट्स ने 1975 में दो साल की पढ़ाई के बाद हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को छोड़ दिया था और पॉल एलन के साथ मिल कर माइक्रोसॉफ्ट कंपनी खड़ी की थी। ऐसा ही कुछ जुकरबर्ग के साथ हुआ था, जब उन्होंने फेसबुक चलाने के लिए हार्वर्ड को अलविदा कह दिया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें