भाजपा नेता व वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा आए दिन जनहित याचिकाएं दाखिल करने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने उपाध्याय से कहा है कि क्या भाजपा आपको अदालत में राजनीतिक सक्रियता लाने के लिए कहती है।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने अश्विनी उपाध्याय से कहा क्या आप पेशेवर जनहित याचिका दाखिल करने वाले कार्यकर्ता बन गए हैं। हम देखते हैं कि आप रोजाना पीआईएल दाखिल करते हैं। आप भाजपा प्रवक्ता है और आपकी सरकार है। आप क्यों नहीं अपनी परेशानी या शिकायतों को लेकर सरकार के पास जाते हैं।
पीठ ने यह भी कहा, क्या भाजपा ने आपको यह काम दिया है। क्या अदालत में अभियान चलाने के लिए भाजपा वित्तीय सहयोग दे रही है। पीठ ने दोटूक कहा कि हम अदालत में राजनीतिक सक्रियता लाने की इजाजत कतई नहीं दे सकते। हम राजनीतिक फायदे के लिए न्यायपालिका के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दे सकते। शीर्ष अदालत ने ये टिप्पणी अश्विनी उपाध्याय द्वारा दाखिल उस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की जिसमें शराब को लेकर राष्ट्रीय नीति बनाने की गुहार की गई थी। अदालत ने इस जनहित याचिका को खारिज कर दिया है।