सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसमें नारकोटिक्स के एक कथित मामले में एक आरोपी की जमानत रद्द कर दी गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि डीआरआई (राजस्व खुफिया निदेशालय) की ओर से जब्त की घई टेबलेट में औषधियां या पुरुषों की क्षमता बढ़ाने वाली दवाइयां थीं और यह एनडीपीएस अधिनियम का उल्लंघन नहीं है।
पिछले साल नवंबपृर में आरोपी को जमानत देने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को फिर से लागू करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी टेबलेट आरोपी के कार्यालय या आवास से जब्त नहीं की गई थी। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में एक अन्य आरोपी की जमानत पर कहा कि अगर ट्रायल कोर्ट उचित मानती है तो उसे जमानत दी जा सकती है।
मद्रास हाईकोर्ट ने जुलाई में रद्द कर दी थी जमानत
शीर्ष अदालत ने कहा कि इस दूसरे आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है और वह पिछले दो साल से हिरासत में है। इस मामले की सुनवाई कर रही पीठ में न्यायाधीश सूर्यकांत और हिमा कोहली भी शामिल थीं। मद्रास हाईकोर्ट ने जुलाई में आरोपी की जमानत रद्द की थी और इस फैसले के खिलाफ दायर दो याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय दिया।
डीआरआई ने जब्त की थीं डेढ़ लाख से ज्यादा टेबलेट
इन दो अलग-अलग याचिकाओं में से एक याचिकाकर्ता ने निचली अदालत की ओर से अपने पक्ष में दिए गए जमानत के निर्णय को रद्द करने के खिलाफ याचिका दायर की थी तो दूसरे ने अपनी जमानत याचिका खारिज करने को चुनौती दी थी। मामले में डीआरआई की चेन्नई जोनल इकाई के अधिकारियों ने करीब एक लाख 37 हजार 665 अलग-अलग टेबलेट जब्त की थीं।