सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के प्रयास के मामले में लक्षद्वीप के लोकसभा सांसद मो. फैजल की दोषसिद्धि और सजा को निलंबित करने वाले केरल हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा, हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक के लिए कानून की सही स्थिति पर विचार नहीं किया। मामले को नए सिरे से तय करने के लिए शीर्ष अदालत ने मंगलवार को वापस हाईकोर्ट को भेज दिया।
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हालांकि, शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश को छह सप्ताह के लिए बढ़ा दिया, जिससे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के फैजल फिलहाल सांसद बने रहेंगे। पीठ ने कहा, मामले को फिर हाईकोर्ट भेज रहे हैं, इसलिए निर्वात पैदा करना उचित नहीं होगा। हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि व सजा को निलंबित करते हुए नए चुनाव की संभावना और इससे होने वाले भारी खर्चों को ध्यान में रखा था। शीर्ष कोर्ट ने कहा, यह निलंबित करने का कारक नहीं होना चाहिए। फैजल ने बचाव में राहुल गांधी के मामले का हवाला दिया था, लेकिन पीठ ने इस तर्क पर विचार नहीं किया।
एल्गार परिषद मामले में जगताप की याचिका पर 21 सितंबर को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट एल्गार परिषद-माओवादी लिंक मामले में एक्टिविस्ट ज्योति जगताप की बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती वाली याचिका पर 21 सितंबर को सुनवाई करेगा। हाईकोर्ट ने 17 अक्तूबर 2022 को जगताप की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा था कि एनआईए का मामला प्रथम दृष्टया सही मालूम होता है। यह भी लगता है कि वह सीपीआई (एम) की बड़ी साजिश का हिस्सा थी।
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जगताप की याचिका जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस संजय कुमार की पीठ के समक्ष आई। एनआईए के वकील ने अदालत से जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा। वहीं याचिकाकर्ता की वकील अपर्णा भट ने पीठ से तारीख तय करने की मांग करते हुए बताया कि जगताप पिछले तीन वर्ष से हिरासत में हैं। इस पर पीठ ने एनआईए को 14 सितंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा और मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को तय कर दी।