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Supreme Court: 30 साल पुराने दौसा बस विस्फोट मामले में बड़ा फैसला, मौत की सजा रद्द; क्यों होगी फिर से सुनवाई?

Tue, 21 Jul 2026 05:21 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल पीटीआई, नई दिल्ली

सार

Dausa Bus Blast Case: राजस्थान के दौसा जिले में 1996 में हुए बस विस्फोट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने मौत की सजा पाए दोषी अब्दुल हमीद की सजा रद्द कर नए सिरे से मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। वहीं, उम्रकैद की सजा काट रहे एक अन्य दोषी को बरी कर दिया। आइए, विस्तार से जानते हैं कि करीब 30 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा सुनवाई का आदेश क्यों दिया?

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दौसा बस विस्फोट मामला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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करीब तीन दशक पहले राजस्थान के दौसा जिले में हुए भीषण बस विस्फोट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने मौत की सजा पाए दोषी अब्दुल हमीद की सजा रद्द करते हुए उसके खिलाफ नए सिरे से मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। साथ ही उम्रकैद की सजा पाए पप्पू उर्फ सलीम को बरी कर दिया है। इसके अलावा राजस्थान हाई कोर्ट की ओर से छह आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की अपील भी खारिज कर दी गई। इस फैसले के साथ लगभग 30 साल पुराने इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया एक बार फिर नए चरण में पहुंच गई है।

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यह मामला 22 मई 1996 का है, जब आगरा से बीकानेर जा रही एक बस में राजस्थान के दौसा जिले में विस्फोट हुआ था। इस धमाके में 14 लोगों की मौत हो गई थी। मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने अब्दुल हमीद को मौत की सजा और पप्पू उर्फ सलीम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में राजस्थान हाई कोर्ट ने भी अब्दुल हमीद की फांसी की सजा बरकरार रखी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2019 में उसकी फांसी पर रोक लगा दी थी और अब अंतिम सुनवाई में बड़ा फैसला सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा क्यों रद्द की?

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि अब्दुल हमीद को मुकदमे के दौरान प्रभावी कानूनी सहायता नहीं मिल सकी। अदालत ने माना कि उसके बचाव पक्ष की ओर से उचित तरीके से पैरवी नहीं हुई। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के 2019 के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई फिर से की जाए। इसके लिए हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एक विशेष अदालत नामित करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि नए ट्रायल को एक साल के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जाए और अदालत की अध्यक्षता एक अनुभवी न्यायाधीश करें। साथ ही अब्दुल हमीद को अपनी पसंद का वकील रखने की भी अनुमति दी गई है।

अन्य आरोपियों पर अदालत ने क्या फैसला दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने पप्पू उर्फ सलीम को सभी आरोपों से बरी कर दिया। उस पर विस्फोट में इस्तेमाल हुए विस्फोटक उपलब्ध कराने का आरोप था और निचली अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं राजस्थान सरकार ने जिन छह आरोपियों को हाई कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी, उस अपील को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। इससे पहले राजस्थान हाई कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के पांच आरोपियों और आगरा के एक आरोपी समेत कुल छह लोगों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था। एक अन्य आरोपी फारुख अहमद खान की बरी होने के फैसले को भी बरकरार रखा गया था।

मामले में अदालत और क्या कुछ कहा?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब्दुल हमीद के खिलाफ पूरे मामले की सुनवाई नए सिरे से होगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस बार मुकदमा निष्पक्ष तरीके से चलाया जाएगा और आरोपी को पूरा कानूनी अवसर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि अब्दुल हमीद का नाम 26 जनवरी 1996 को जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में बम लगाने के मामले में भी प्रमुख आरोपियों में शामिल रहा है। हालांकि वर्तमान फैसला केवल दौसा बस विस्फोट मामले से जुड़ा है। अब सभी की नजर नए ट्रायल पर रहेगी, जिससे यह तय होगा कि करीब 30 साल पुराने इस मामले का अंतिम कानूनी निष्कर्ष क्या होगा।

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