सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को ट्विटर कम्यूनिकेशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की उस याचिका पर केंद्र और सात राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है जिसमें उसके खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द करने की मांग की गई है।
दरअसल, गुरपतवंत सिंह पन्नू के खालिस्तान समर्थन वाले ट्वीट को प्रमोट करने के कथित आरोप पर ट्विटर इंडिया के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने ट्विटर इंडिया की याचिका पर भाजपा आईटी सेल के राष्ट्रीय सह संयोजक विनीत गोयनका को भी नोटिस जारी किया है।
ट्विटर इंडिया का कहना है कि पन्नू द्वारा ट्विटर पर एक ट्वीट पोल किया था, ‘क्या भारत को खालिस्तान 2020 को मान्यता देनी चाहिए?’ इसके बाद उसके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गई है। याचिका में कहा गया है कि गोयनका और अन्य शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि ट्विटर ने वित्तीय लाभ के लिए पन्नू के ट्वीट को बढ़ावा दिया, जबकि ट्विटर इंडिया ने उसके ट्वीट को ब्लॉक कर दिया था और उसके अकाउंट को सस्पेंड दिया था।
ट्विटर इंडिया ने कहा है कि पिछले महीनों में गोयनका और उनके समर्थकों ने वेबिनार आयोजित कर कहा था कि ट्विटर को आतंकवादी संगठन घोषित किया जाना चाहिए और उसके अधिकारियों पर देशद्रोह का मुकदमा किया जाना चाहिए। साथ ही ट्विटर और उसके कर्मचारियों के खिलाफ बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज करने के लिए उकसाया गया।
ट्विटर इंडिया का कहना है कि गोयनका और उनके समर्थन द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद, निराधार और द्वेषपूर्ण हैं। उसका यह भी कहना है कि वह अपने मंच पर प्रचारित सामग्री के लिए राजस्व एकत्र नहीं करता है।