कोरोना महामारी के संकट के दौर में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना लागू न करने को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और ओडिशा सरकार को नोटिस जारी किया।
याचिका में इन राज्यों पर राजनीतिक कारणों से इस योजना को लागू नहीं करने का आरोप है। इस योजना के तहत कोविड-19 सहित विभिन्न बीमारियों का मुफ्त इलाज होता है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की पीठ इस मामले पर दो हफ्ते बाद सुनवाई करेगी। चीफ जस्टिस बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने हैदराबाद के भाजपा नेता पी. शेखर राव की याचिका पर केंद्र सरकार से भी जवाब मांगा है।
याचिका में कहा गया है कि अधिकतर राज्यों ने लोगों के हित के लिए राज्य स्तर की स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के अलावा आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना को लागू किया है लेकिन राजनीतिक कारणों के चलते दिल्ली, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और ओडिशा इसे लागू नहीं कर रहे, जिससे वहां के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा।
याचिकाकर्ता ने इन राज्यों के रवैये को असंविधानिक करार देने की गुहार लगाई है। राव ने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना के कार्यान्वयन के लिए केंद्र और चार राज्यों को एक नीति बनाने के लिए दिशानिर्देश की मांग भी की है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने मार्च से अगस्त के बीच आयुष्मान भारत योजना को लागू करने को लेकर कई दिशानिर्देश जारी किए हैं। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 16,039 अस्पताल आते है, इनमें 8059 निजी अस्पताल भी हैं। प्राधिकरण ने लगभग 1500 उपचार प्रक्रियाओं की दरें भी तय कीं है। देशभर में योजना के कार्यान्वयन के लिए 2020-21 के लिए लगभग 6400 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।