कांग्रेस नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर 31 अगस्त के उस आदेश को वापस लेने की अपील की जिसमें दिल्ली में रेल पटरियों के किनारे बसी लगभग 48,000 झुग्गियां हटाने का आदेश दिया गया था।
जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि यह अतिक्रमण हटाने से रोकने में किसी राजनीतिक हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी। अतिक्रमण हटाने के लिए तीन महीने का वक्त दिया गया है।
माकन ने आदेश को चुनौती देते हुए कहा, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को अंधेरे में रखा गया। वकील अमन पंवार व नितिन सलूजा के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि झुग्गीवासियों का पक्ष सुने बिना आदेश पारित किया गया, इसलिए इसे बरकरार नहीं रखा जा सकता।
याचिका में कहा गया है कि रेल मंत्रालय और दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष गत वर्ष 18 मार्च के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का जिक्र नहीं किया। हाईकोर्ट ने उस आदेश में झुग्गी बस्तियों को हटाने के लिए प्रोटोकॉल पर मुहर लगाई थी।
याचिका में माकन ने कहा कि इस बारे में जानकारी न देकर सुप्रीम कोर्ट को अंधेरे में रखा गया। वैकल्पिक जगह की व्यवस्था किए बगैर तोड़फोड़ या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा, झुग्गी वालों को भी शहर में रहने का अधिकार है क्योंकि वे शहर के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने का अभिन्न हिस्सा हैं। कोरोना महामारी के बीच इन बस्तियों को हटाया जाता है तो करीब ढाई लाख लोग आश्रय और आजीविका के लिए भटकने को मजबूर हो जाएंगे।