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धारा-66 ए के तहत अब भी हो रही गिरफ्तारी, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को किया तलब

Mon, 07 Jan 2019 08:55 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा-66 ए को निरस्त किए जाने के बावजूद इस धारा के तहत हो रही गिरफ्तारी के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर यह दावा सही है तो यह सूचना सकते में डालने वाली है। मालूम हो कि वर्ष 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने धारा-66 ए को निरस्त कर दिया था। न्यायमूर्ति रोहिंग्टन एफ नरीमन और न्यायमूर्ति विनीत शरण की पीठ ने धारा-66 ए के तहत गिरफ्तारी का जो आ रोप लगाया गया है अगर यह सही पाया गया तो हम कड़ी कार्रवाई करेंगे। पीयूसीएल नामक संगठन की ओर से दायर इस याचिका पर पीठ ने केंद्र सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। सभी को चार हफ्ते में इस पर जवाब दाखिल करने केलिए कहा गया है। 

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याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वकील संजय पारिख ने पीठ केसमक्ष यह दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा धारा-66 ए को निरस्त करने केबावजूद ऐसी रिपोर्ट आ रही है कि इस धारा के तहत लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। एफआईआर दर्ज की जा रही है। ऐसी जानकारी मिली है कि देश के अलग-अलग इलाकों से करीब 45 लोगों को इस धारा के तहत गिरफ्तार करने की सूचना है। याचिका में कहा गया कि इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन केहालिया वर्किंग पेपर में यह कहा गया कि धारा-66ए को खत्म नहीं किया गया है।  इस पर पीठ ने बेहद हैरानी जताई। 
 
मालूम हो कि धारा-66 ए के तहत सोशल मीडिया साइट्स पर आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री परोसने वालों के लिए तीन वर्ष जेल तक की सजा का प्रावधान था। इस धारा के तहत निर्दोष लोगों की गिरफ्तारी के बाद चारों ओर से इसके खिलाफ आवाज उठने पर सुप्रीम कोर्ट में इस धारा को असंवैधानिक और गैरकानूनी करार देने की मांग को लेकर कई याचिकाएं दायर की गईं। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस धारा को अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन बताते हुए निरस्त कर दिया था।  

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