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नाथुला की बर्फबारी फंसे 3000 पर्यटकों के लिए देवदूत बने सेना के जवान 

Mon, 07 Jan 2019 08:43 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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सिक्किम से लगे भारत चीन सीमा का नाथुला दर्रा। 28 दिसंबर की भीषण ठंढ में 14140 फीट की उंचाई पर स्थित इस दर्रे में करीब 3000 पर्यटक नए साल का जश्न मनाने के जोश में पहुंचे। बच्चों, महिलाओं और बुर्जुर्गों की इस बड़ी भीड़ को अंदाजा नहीं था कि मौसम किस कदर मौत का पैगाम लेकर आने वाला है। अचानक मौसम ने पटली मारी और भयानक बर्फबारी शुरु हो गई। यह पर्यटक अपने 300 वाहनों समेत ऐसे फंसे कि बच निकलने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा था। तब इनके बचाव में आए सीमा पर तैनात सेना के जवान और अधिकारी।    

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सेना के जवानों ने अगले एक हफ्ते तक खुद को खुले में रखा और 3000 पर्यटकों को अपने बंकरों और अस्थायी निर्माण में जगह देकर उन्हें मौत केमुंह से बाहर खींच लिया। रविवार तक सभी पर्यटकों को सकुशल सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया। इसके लिए सेना ने जान पर खेल कर सड़का का रास्ता साफ किया। बर्फ हटाने वाली मशीन और बार्डर रोड आर्गनाईजेशन की मदद से पूरी कार्रवाई को बड़ी सफाई से अंजाम दिया गया। जबतक रास्ता साफ हुआ सेना ने सभी पर्यटकों को गरम कपड़े, स्लीपिंग बैग, दवा और मौसम के मुताबिक गर्म भोजन लगातार मुहैया कराया। सेना के मुताबिक उस दुर्गम जगह पर ऐसे खराब मौसम में करीब 3000 लोगों के लिए खाने पीने और रहने का इंतजाम करना कोई आसान काम नहीं था। यह कार्रवाई उनके लिए भी एक तजुर्बा था। 
 
सेना के पूर्वी कमान के पीआरओ कर्नल सी कंवर ने बताया कि पर्यटक दर्रे के 17 मील पर आकर बुरी तरह फंस गए थे। उस खराब मौसम में वहां से निकलने का कोई जरिया नहीं था। जवान और अधिकारी ने अपनी परवाह किए बिना इन्हें सुरक्षित रखने का फैसला किया। सभी  पर्यटकों को 17 मील और  13 मील  पर स्थित बंकरों में जगह दी गई। इन्हें अपने परिवार की तरह रखा गया। वहां तैनात सैनिकों ने  बखूबी सेना की परंपरा का निर्वहन किया है। 
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इस संकट के निकल दिल्ली पहुंची पर्यटक दिप्ति शाह ने जब यह वाकया सुनाया तो उनकी आंखों में आंसू छलक आए । दिप्ति ने कहा कि किसी सैनिक से उनका पहले कोई सामना नहीं हुआ था। इस तजुर्बे के बाद वह कहती हैं कि सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि सभी  3000 लोगों के लिए सैनिक भगवान का दूसरा रुप हैं। वह जीते जी इन सैनिकों को कभी नहीं भूलेंगी। 

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