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निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र से जवाब तलब, गुरुग्राम हादसे की जांच की भी मांग

Mon, 21 Sep 2026 05:22 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण श्रमिकों की व्यावसायिक सुरक्षा से जुड़ी जनहित याचिका पर केंद्र और हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में गुरुग्राम हादसे की स्वतंत्र जांच और मुआवजे की मांग भी की गई है।

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निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों की व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए मानक तय करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। याचिका में 2020 के व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियां संहिता के तहत निर्माण श्रमिकों के लिए सुरक्षा मानक तय करने की मांग की गई है।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। पीठ ने हरियाणा सरकार समेत अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है।

निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा का मुद्दा उठा
याचिकाकर्ता नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर सेंट्रल लेजिस्लेशन ऑन कंस्ट्रक्शन लेबर की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण पेश हुए। उन्होंने कहा कि याचिका में निर्माण श्रमिकों की व्यावसायिक सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा उठाया गया है।
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भूषण ने अदालत को बताया कि 2020 की OSH संहिता में निर्माण स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा के मुद्दे को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया गया है। उनके मुताबिक, निर्माण स्थल पर दुर्घटना के बाद आमतौर पर एफआईआर दर्ज होती है, लेकिन श्रमिकों को कितना मुआवजा दिया जाना चाहिए, इसे तय करने के लिए प्रभावी व्यवस्था का अभाव है।

अदालत ने कहा- कानूनों की कमियां बताएं
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि यह ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां कोई कानून ही मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानूनों की जांच की जा सकती है और यदि उनमें कोई कमी है तो उसे अदालत के सामने रखा जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि याचिका में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को भी पक्षकार बनाया जा सकता है।

निर्माण हादसों का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने की मांग
जनहित याचिका में केंद्र और सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एक समान राष्ट्रीय व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। इसके तहत निर्माण स्थलों पर होने वाली मौतों और गंभीर चोटों, हादसों के कारणों, निरीक्षण, कानूनी कार्रवाई, अभियोजन, मुआवजे और श्रमिक कल्याण से जुड़ी जानकारी दर्ज करने, एकत्र करने और समय-समय पर सार्वजनिक करने की मांग की गई है। याचिका में ऐसी जानकारी को श्रमिकों की सुरक्षा, हादसों की रोकथाम और नियामकीय जवाबदेही के लिए जरूरी बताया गया है।

9 मार्च के गुरुग्राम हादसे की स्वतंत्र जांच की मांग
याचिका में गुरुग्राम के सिधरावली इलाके में 9 मार्च 2026 को हुए निर्माण स्थल हादसे की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की भी मांग की गई है।

याचिका के अनुसार, सिग्नेचर ग्लोबल सिटी ऑफ कलर्स निर्माण स्थल पर मिट्टी का ढेर गिरने से सात श्रमिकों की मौत हो गई थी, जबकि चार अन्य घायल हुए थे। घायलों में नेपाल के तीन नागरिक भी शामिल थे। याचिकाकर्ता ने हादसे की व्यापक जांच की मांग की है। इसमें डेवलपर, उसके निदेशक और प्रबंधन, परियोजना एवं सुरक्षा अधिकारियों, इंजीनियरों, ठेकेदारों, उप-ठेकेदारों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच शामिल है।

मृतकों और घायलों को मुआवजा देने की मांग
याचिका में सक्षम श्रम, मुआवजा और कल्याण अधिकारियों को सभी मृत और घायल श्रमिकों की पहचान और सत्यापन करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसके बाद मुआवजा, चिकित्सा सहायता और पुनर्वास से जुड़े लाभ समयबद्ध तरीके से तय कर उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

याचिका में मृत श्रमिकों के परिवारों और घायल श्रमिकों को श्रम कल्याण बोर्ड के लाभ, बकाया मजदूरी और कानून के तहत मिलने वाले अन्य वैधानिक भुगतान दिलाने की भी मांग की गई है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

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