सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को उस याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें ट्रांसजेंडर (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम-2019 की धारा-18 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। साथ ही, ट्रांसजेंडर के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए सख्त व कड़ी सजा की मांग की गई है।
जस्टिस एल. नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए याचिका को लंबित समान याचिका के साथ जोड़ दिया। सामाजिक एवं ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता काजल मंगल मुखी की इस याचिका में मांग की गई है कि ट्रांसजेंडर के खिलाफ अपराधों के वर्गीकरण और उनके खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए दंड का प्रावधान भारतीय दंड संहिता (1860), बंधुआ मजदूरी (उन्मूलन) अधिनियम और अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के अनुरूप हो।
वकील शांतनु कुमार के माध्यम से दायर याचिका में भारत में ट्रांसजेंडर की सुरक्षा और कल्याण योजना के प्रभावी व उद्देश्यपूर्ण कानूनी ढांचे को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कानूनी खामियों को दूर करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग की गई है।
याचिका में तर्क है कि अधिनियम की धारा-18 भेदभावपूर्ण और कानून के बुनियादी और स्थापित सिद्धांतों के खिलाफ है। यह ट्रांसजेंडर के बुनियादी मानवाधिकारों का भी उल्लंघन करती है। धारा-18 में अपराध और दंड का प्रावधान है। इसके तहत कम से कम छह माह और अधिकतम दो वर्ष कारावास का प्रावधान है।
याची को जजों के प्रशिक्षण पर सुझाव सौंपने की इजाजत
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक पूर्व न्यायिक अधिकारी को जजों के प्रशिक्षण के संबंध में अपने सुझाव राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (एनजेए) को विचार के लिए सौंपने की अनुमति दे दी है। जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने कहा कि यह अदालत में बहस का विषय नहीं, इसके बजाय यह मामला विशेषज्ञों को देखना चाहिए।
याची के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि समस्या यह है कि न्यायिक अकादमियों के पाठ्यक्रम कानूनी स्कूलों जैसे हैं। पीठ ने कहा कि इस पर विचार के लिए सक्षम प्राधिकारी मौजूद हैं। इस याचिका में उठाए गए विषयों का मकसद न्यायिक अकादमियों में प्रशिक्षण का स्तर सुधारना है। इस पर विचार किया जा सकता है।
याचिका का निपटारा करते हुए पीठ ने कहा कि हम याची को इस संबंध में अपने सुझाव एनजेए के निदेशक को सौंपने की अनुमति देते हैं। वहां से इन्हें प्रक्रिया के तहत संबंधित अकादमी में पहुंचाया जा सकता है।