सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी की उस याचिका पर महाराष्ट्र विधानसभा के सचिव से जवाब दाखिल करने के लिए कहा है जिसमें मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की आलोचना पर उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव जारी किया गया है।
चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अर्नब की याचिका पर विधानसभा सचिव को नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
पीठ ने गोस्वामी के वकील हरीश साल्वे द्वारा कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने की मांग को ठुकरा दिया लेकिन मौखिक रूप से कहा कि वे तब तक कुछ नहीं करेंगे जब तक मामला यहां लंबित है। सुनवाई के दौरान साल्वे ने कहा, विधानसभा का विशेषाधिकार सदन तक सीमित है। किसी ने राज्य सरकार के लिए कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया हो तो यह इसके दायरे में नहीं आता।
उन्होंने कहा, यह मामला अनुच्छेद 19 (बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और 21 से संबंधित है और विशेषाधिकार प्रस्ताव इन अधिकारों को रद्द नहीं कर सकता है।
साल्वे ने कहा, यह मामला सात न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष विचाराधीन है। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, हम मामले की गंभीरता को समझते हैं लेकिन यह सिर्फ कारण बताओ नोटिस है न कि विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव।
इस पर साल्वे ने कहा कि वह केवल अधिकारक्षेत्र के मुद्दे पर हैं। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि विशेषाधिकार प्रस्ताव को एक समिति द्वारा निपटाया जाना है। जवाब में साल्वे ने कहा कि मुख्यमंत्री की आलोचना करने पर विधानसभा सचिव ने नोटिस भेजा है।