दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को उस जनहित याचिका को सुनने से इंकार कर दिया, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्विटर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि ट्विटर भारत के खिलाफ खालिस्तान आंदोलन जैसे भारत विरोधी दुष्प्रचार को बढ़ावा देने की साजिश रच रहा है। हालांकि हाईकोर्ट ने याचिका को महज दावों पर आधारित बताते हुए उसे खारिज कर दिया। साथ ही याचिकाकर्ता संगीता शर्मा को पहले केंद्र सरकार से गुहार लगाने का आदेश दिया।
जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा, याचिका में से कोई भी मुद्दा भारत सरकार के सामने नहीं उठाया गया है और अपील पब्लिक डोमेन में मौजूद कुछ खबरों और एक संसद सदस्य के दावों पर आधारित है। पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा के उस तर्क को भी स्वीकार किया कि याची को कोर्ट आने से पहले अपनी समस्या के निराकरण के लिए अधिकारियों से मिलना चाहिए। इसके बाद पीठ ने याचिकाकर्ता को अपनी अपील वापस लेने और केंद्र सरकार के सामने उचित विरोध पत्र दाखिल करने की इजाजत दे दी।