बच्चों से बढ़ रहे लैंगिक अपराधों पर सख्त रुख दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पूरे देश के लिए सोमवार को निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि जिन जिलों में ऐसे 300 से अधिक मामले दर्ज हैं, वहां दो विशेष अदालतें बनाई जाएं। इनमें केवल लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण अधिनियम-2012 (पॉक्सो) के तहत दर्ज मामले ही सुने जाएं।
इससे पहले 25 जुलाई को कोर्ट ने केंद्र के फंड से उन जिलों में एक-एक विशेष अदालत बनाने को कहा था, जहां पॉक्सो के 100-100 मामले दर्ज हैं। इनमें न्यायिक अधिकारियों व स्टाफ की नियुक्ति व बुनियादी सुविधाएं मुहैया करवाना केंद्र की जिम्मेदारी बताई गई थी।
जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि इन अदालतों में पॉक्सो के ही मामले सुने जाएंगे। कोर्ट ने यह निर्देश भी दिया कि बच्चों से लैंगिक अपराधों पर जागरुकता के लिए छोटी फिल्में बनाई जाएं, जिन्हें सिनेमा घरों और टीवी चैनलों पर नियमित दिखाया जाए।
दुष्कर्म मामलों के लिए भी विशेष अदालत
कोर्ट ने यह भी कहा कि जहां पॉक्सो के कम मामले हों, वहां दुष्कर्म के मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाई जा सकती हैं। जस्टिस गुप्ता ने कहा, मैं हाईकोर्ट में भी जज रह चुका हूं और जानता हूं कि अगर कहीं अदालतों की संख्या अधिक है और काम कम, तो यह व्यवस्था को निष्प्रभावी बना देता है।