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हम सुनिश्वित होना चाहते हैं कि विधायक अपनी मर्जी से होटल में हैं: सुप्रीम कोर्ट

Thu, 19 Mar 2020 06:40 AM IST
संजीव कुमार झा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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कमलनाथ-शिवराज सिंह चौहान - फोटो : ANI
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह यह सुनिश्चित होना चाहता है कि मध्य प्रदेश के 16 बाकी विधायकों अपनी इच्छा से बंगलुरु में होटल में हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि हम विधायकों पर विधानसभा की कार्यवाही में जाने के लिए बाध्य नहीं कर सकते लेकिन हमें यह आश्वस्त होना चाहते हैं कि ये विधायक अपनी इच्छा से निर्णय ले सके।
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साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष से सवाल किया कि आखिर आपने 16 विधायकों के इस्तीफे को स्वीकार क्यों नहीं किया? अगर आप संतुष्ट नहीं है तो आप इस्तीफे को नामंजूर भी कर सकते थे। बुधवार को करीब साढ़े तीन घंटे की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने वृहस्पतिवार के लिए टाल दी। 

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा कि बागी विधायकों ने हलफनामा दाखिल कर खुद को याचिकाकर्ता बताया है, मानो वे रिट याचिका दायर करने जा रहे हैं। हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है। पीठ ने कहा कि यह इन(बागी विधायकों) पर निर्भर है कि वे विधानसभा में जाना चाहते हैं या नहीं व व्हिप का पालन करते हैं या नहीं। लेकिन जब आरोप यह हो कि उन्हें बंधक बनाकर रखा गया है तो हमें यह देखना होगा कि वे अनी मर्जी में होटल में हैं या नहीं। 
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साथ ही पीठ ने मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि अगर आपने 16 विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया होता तो क्या वे खुद अयोग्य नहीं हो जाते? अगर आप सुंष्ट नहीं है तो आप इस्तीफेको नामंजूर भी कर सकते थे। पीठ ने विधानसभा अध्यक्ष से पूछा कि अगर ये विधायक वृहस्पतिवार को आपके समक्ष पेश होते हैं तो क्या आप उनके इस्तीफे पर निर्णय ले सकते हैं।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने हालिया आदेश में विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफे पर जल्द निर्णय केलिए कहा गया था। इस पर विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि  अध्यक्ष केस्वविवेक पर किसी तरह प्रहार नहीं किया जाना चाहिए। सिंघवी ने कहा कि वह वृहस्पतिवार को इस बारे में बताएंगे।

वहीं बागी विधायकों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने पीठ से कहा कि हम विधानसभा अध्यक्ष केसमक्ष पेश नहीं हो सकते। वहां हमारी सुरक्षा को खतरा है। सिंह ने कहा कि बागी विधायक सुप्रीम कोर्ट में पेश होने केलिए तैयार हैं। इस पर पीठ ने कहा कि हम समझ सकते हैं कि आप ऐसा क्यों कह रहे हैं लेकिन ऐसा करना उचित नहीं होगा।

वहीं शिवराज सिंह चौहान व अन्य भाजपा नेताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि रजिस्ट्रार जनरल या किसी अन्य को उन विधायकों से मिलने के लिए भेजा जाए और उसका सीधा प्रसारण हो। लेकिन पीठ ने रजिस्ट्रार जनरल को बागी विधायकों से मिलने केलिए भेजने से इनकार कर दिया। 
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किसने क्या दलीलें दी

कमलनाथ-शिवराज सिंह चौहान - फोटो : ANI
कांग्रेस पार्टी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि कि जब तक खाली सीटों पर चुनाव नहीं हो जाते तब तक विश्वास मत को टाल दिया जाना चाहिए। कमलनाथ सरकार को बने रहने देने से कोई आसमान नहीं टूट जाएगा।  विधायकों का इस्तीफा एक मायने में दल-बदल है। बंधक रखे गए 16 विधायकों को रिलीज किया जाना चाहिए। विधायक अपने इलाके में लोगों के सेवा के लिए होते हैं।

वह इस्तीफा देकर इस तरह से नहीं जा सकते हैं। ये अजीबोगरीब स्थिति है। लोगों ने कांग्रेस को 114 सीटें दी और बीजेपी 109 सीटें जीत पाई। वहां एक स्थायी सरकार 18 महीने से चल रही है। बीजेपी एक जिम्मेदार पार्टी है क्या ऐसी पार्टी से हम ऐसी उम्मीद कर सकते हैं। कल होकर किसी भी दल केविधायकों का अपहरण कर लिया जाए और सुप्रीम कोर्ट में आकर कहा जाए कि फ्लोर टेस्ट कराया जाए।

अदालत को इस तरह की याचिका पर विचार नहीं करना चाहिए। कुद लोग धन-बल के जरिए   लोकतांत्रिक मूल्यों को खत्म करने में लगे हुए हैं। राज्यपाल कहते हैं कि कमलनाथ सरकार बहुमत खो चुकी है। आखिर राज्यपाल दफ्तर को यह कैसे पता है।

भाजपा नेताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि  कांग्रेस वही पार्टी है जिसने 1975 में इमरजेंसी लगाई थी। पार्टी सिर्फ सत्ता में बने रहना चाहती है। विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है और वह जनता के पास दोबारा जाना चाहते हैं।

ये दलबदल कानून का मामला नहीं है। राज्यपाल राज्य के संवैधानिक मुखिया हैं और उनका यह कर्तव्य है कि वह राज्य में सरकार सुनिश्चित करें। संविधान के तहत ये उनका दायित्व है। यह अजीबोगरीब दलील है कि  ये पहले उपचुनाव हो, उसकेबार फ्लोर टेस्ट कराया जाए। कमनाथ सरकार अल्पमत में है लिहाजा उसे बने रहने का अधिकार नहीं है।


विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि  क्या अदालत विधानसभा अध्यक्ष केविवेक को नजरअंदाज कर फ्लोर टेस्ट कराने का निर्देश देगी। उन्होंने कहा कि यह दलील मौलिक रूप से गलत है कि फ्लोर टेस्ट कराने राज्यपाल केअधिकारक्षेत्र में है।

जबकि यह विधानसभा अध्यक्ष के अधिकारक्षेत्र में है। अनुच्छेद-212 अदालत पर विधानसभा के भीतर होने वाली कार्यवाही पर संज्ञान लेने पर रोक लगाती है। नई विधानसभा की स्थिति में ही फ्लोर टेस्ट हो सकता है। मौजूदा विधानसभा में विश्वास मत या अविश्वास मत होता है।

मुख्यमंत्री कमलनाथ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि एक मुख्यमंत्री होने केनाते वे बागी विधायकों से मिलना चाहते हैं क्योंकि वे सभी कांग्रेसी हैं।
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