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विवाद: संसद व विधानसभाओं में जन प्रतिनिधियों के उद्दण्ड व्यवहार का उच्चतम न्यायालय ने लिया कड़ा संज्ञान

Mon, 05 Jul 2021 08:28 PM IST
संजीव कुमार झा राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

 जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा कि माइक्रोफोन फेंकना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी ही चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि विधानसभा ही नहीं संसद में भी 'हुड़दंग' की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तरह की घटनाओं को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी केरल में वामपंथी दलों के विधायकों द्वारा 2015 में विधान सभा के अंदर हुए हंगामे से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने प्रथम दृष्टया इस तरह के व्यवहार को अनुचित और अस्वीकारयोग्य माना है।

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा कि माइक्रोफोन फेंकना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी ही चाहिए। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, 'प्रथम दृष्टया हमें इस तरह के व्यवहार पर सख्त रुख अपनाना होगा। यह स्वीकार्ययोग्य व्यवहार नहीं है।

सदन के पटल पर माइक फेंकने वाले विधायक के व्यवहार को देखें। उन्हें मुकदमे का सामना करना चाहिए।' वहीं जस्टिस शाह ने कहा, 'वे विधायक थे और लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। इस तरह का आचरण सही नहीं है।' दरअसल, शीर्ष अदालत केरल सरकार द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें 2015 में केरल विधानसभा में प्रमुख माकपा नेताओं के खिलाफ मामले को वापस लेने की अनुमति मांगी गई थी। उस समय राज्य में मौजूदा सत्ताधारी पार्टी विपक्ष में थी।
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राज्य सरकार ने केरल हाईकोर्ट के 12 मार्च, 2021 के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। पहले तिरुवनंतपुरम में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और बाद में हाईकोर्ट से मौजूदा मंत्रियों सहित आरोपियों के खिलाफ मुकदमा वापस लेने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिल पाई थी। शीर्ष अदालत ने बार-बार कहा कि इस तरह के व्यवहार को माफ नहीं किया जा सकता है और आरोपी को सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मुक़दमा चलना चाहिए। 

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, 'इस तरह के व्यवहार को माफ नहीं किया जा सकता है। उस विधायक की रक्षा करने का क्या मतलब है जिसने वित्त विधेयक को पारित होने से रोका। वित्त मंत्री की प्रतिष्ठा चाहे कुछ भी हो लेकिन वित्त विधेयक का पारित होना महत्वपूर्ण है।' जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह भी कहा, विधानसभा की कार्यवाही लोकतंत्र के प्रहरी "हैं और यह मर्यादा की भावना बनाए रखने के लिए आवश्यक है। वहीं जस्टिस शाह ने कहा, 'अब ये घटनाएं अक्सर हो रही हैं। यह संसद में भी हो रही है।'  शीर्ष अदालत ने अंततः मामले को 15 जुलाई के लिए स्थगित कर दिया।

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