आईसीएमआर-एनसीईडी की निदेशक शांता दत्ता ने बताया कि प्रस्तावित अनुसंधान परियोजना पर एक जर्मन कंपनी के सहयोग से कार्य किया जाएगा और इसे प्रस्तुति के लिए चयनित किया गया है।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 का यह टीका विकसित होने पर पोलियो के टीके की तर्ज पर 'ड्रॉप' के रूप में इसकी भी खुराक दी जा सकेगी। वर्तमान में कोविड का टीका इंजेक्शन के जरिए लगाया जाता है।
दत्ता ने कहा, हमने एक ओरल टीके के लिए प्रस्ताव सौंपा है। इसे मंजूरी मिलने और धन उपलब्ध कराए जाने पर काम शुरू किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला में ओरल टीका विकसित करने में पांच-छह साल का समय लगेगा। दत्ता ने कहा कि विकसित हो जाने पर पहले जंतुओं पर इसका परीक्षण किया जाएगा, जैसा कि हर टीके का किया जाता है।
उन्होंने कहा, ‘समूची प्रक्रिया में कम से कम से छह साल का समय लगेगा और उसके बाद ही हम बाजार में ओरल टीके उपलब्ध होने की उम्मीद कर सकते हैं।’