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बाल विवाह के मामले में बलात्कार की सजा सही नहीं: सुप्रीम कोर्ट

Thu, 10 Aug 2017 01:41 PM IST
amarujala.com- Presented by: अभिषेक मिश्रा
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सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बाल विवाह के मामले में बलात्कार कानून लगाना सही नहीं होगा क्योंकि बलात्कार कानून के तहत न्यूनतम सात वर्ष की सजा का प्रावधान है। यह कठोर सजा होगी। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा है कि पिछले तीन वर्षों में बाल विवाह के मामले में कितने लोगों के खिलाफ मुकदमा चला और कितनों को सजा हुई। 
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न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने केंद्र सरकार को यह बताने के लिए कहा कि बाल विवाह को लेकर पिछले तीन वर्षों में कितने लोगों के खिलाफ मुकदमे चलाए गए और कितने लोगों को सजा हुई। पीठ ने सरकार को तीन हफ्ते में इससे संबंधित तमाम रिकॉर्ड पेश करने के लिए कहा है।

साथ ही पीठ ने सरकार से यह जानना चाहा कि क्या आपके पास बाल विवाह रोकने के लिए पर्याप्त संख्या में अधिकारी हैं? पीठ ने सरकार को तीन हफ्ते में यह भी बताने के लिए है कि बाल विवाह रोकथाम अधिकारियों की संख्या कितनी है? 2011 की जनगणना के हिसाब से देश में 12 मिलियन बच्चों की शादी 10 वर्ष की आयु से पहले हो जाती है। इनसे में 65 फीसदी लड़कियां हैं। 
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वास्तव में शीर्ष अदालत उस संगठन की याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें कहा गया कि 15 से 18 वर्ष के बीच शादी करने वाली महिलाओं को किसी तरह का संरक्षण नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील गौरव अग्रवाल ने पीठ ने कहा कि एक तरह लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष हैं वहीं इससे कम उम्र की लड़कियों की शादी हो रही है।

15 से 18 वर्ष की लड़कियों की शादी अवैध नहीं होती है लेकिन इसे अवैध घोषित किया जा सकता है। इतनी कम में उम्र में लड़कियों की शादी से उसके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। 
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15 से 18 वर्ष की लड़कियों की शादी अवैध नहीं होती है : याचिकाकर्ता

उन्होंने कहा कि 15 से 18 वर्ष के बीच लड़कियों की शादी को असंवैधानिक घोषित किया जाना चाहिए। 18 से कम उम्र की लड़कियों को यह नहीं पता होता है कि शादी के क्या परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि शादी का एक ही बेंचमार्क होना चाहिए। लड़कियों की शादी के लिए संसद ने न्यूनतम 18 वर्ष है, जो मानसिक आयु है। ऐसे में इसका कोई अपवाद नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसे लेकर सीआरपीसी में तो बदलाव कर दिया गया लेकिन भारतीय दंड संहिता में संशोधन नहीं किया गया। 

जवाब में पीठ ने कहा कि क्या इस मामले में न्यायपालिका का दखल बनता है। पीठ ने कहा कि हम तब ही दखल दे सकते हैं प्रावधान असंवैधानिक हो। साथ ही पीठ ने यह भी कहा, ‘आप हमेशा यह नहीं कह सकते कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों को परिणाम के बारे में पता नहीं होता है। 

अगर लड़की हत्या करती है तो हम कतई यह नहीं कह सकते कि उसे हत्या करने से होने वाले परिणामों से अनभिज्ञ हो।’ हालांकि पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील को इस संबंध में और जानकारी जुटाने के लिए कहा है। अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी।
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