आपसी सहमति से तलाक के लिए भी इंतजार करना जरूरी है
यह थी याचिका: सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दर्ज कर कहा गया था-
- क्या आपसी सहमति से तलाक के लिए भी इंतजार करना जरूरी है?
- हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 (बी) के तहत आपसी सहमति से तलाक के लिए जरूरी प्रतीक्षा अवधि (कूलिंग पीरियड) में छूट दी जा सकती है या नहीं? शीर्ष अदालत ने इस मामले में पिछले साल 29 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
यह है हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13 (बी)
उपधारा (1): पति-पत्नी एक साल से अधिक समय से अलग रह रहे हों या वे साथ नहीं रह सकते या आपसी सहमति से शादी खत्म करना चाहते हैं, तो जिला अदालत में तलाक की याचिका दे सकते हैं।
उपधारा (2): दोनों पक्षों को 6 से 18 महीने तक का इंतजार करना होगा। यह अवधि इसलिए दी जाती है कि पति-पत्नी को सुलह का मौका मिल सके। कम से कम छह माह में भी सुलह का कोई रास्ता नहीं निकलता है तो तलाक हो जाता है।
सुप्रीम कोर्ट में इसी छह माह की अवधि के इंतजार को चुनौती दी गई थी।