फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अनुसूचित जातियों पर राष्ट्रपति के आदेश में बदलाव नहीं कर सकती है अदालत : सुप्रीम कोर्ट

Sun, 20 Dec 2020 05:23 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
विज्ञापन
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा कि अनुसूचित जातियों पर राष्ट्रपति के आदेश में अदालत द्वारा बदलाव नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी आदिवासी समुदाय या जनजातियों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) के रूप में निर्दिष्ट करने की शक्ति संविधान के तहत राष्ट्रपति के पास है। अनुच्छेद 342(1) के तहत राष्ट्रपति के पास निहित इस अधिकार को अदालत द्वारा परीक्षण नहीं किया जा सकता।

विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह अदालत का काम नहीं है कि राष्ट्रपति के पास एक विशेष समुदाय को एसटी में शामिल करने का अधिकार है या नहीं? जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने यह कहते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के 2018 के एक फैसले को दरकिनार कर दिया जिसमें यह तय करने का निर्णय लिया गया था कि क्या जनजाति गोवारी अनुसूचित जनजाति गोंड गोवारी का हिस्सा है। हाईकोर्ट ने कहा था कि गोवारी को अनुसूचित जनजाति घोषित किया जाए। गोंड गोवारी को पहले से ही संविधान के तहत अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें