सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना कार्मिक विभाग (डीओपीटी) को भारी पड़ गई है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को डीओपीटी के सचिव को यह बताने के लिए कहा है कि केंद्र सरकार के अधिकारियों (आईएएस-आईपीएस को छोड़कर) के प्रमोशन पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश का उल्लंघन करने पर क्यों नहीं उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए?
सुप्रीम कोर्ट ने सचिव से पूछा, क्यों नहीं आपके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए
जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस विनीत शरण की पीठ ने देवेंद्र साहू द्वारा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर कार्मिक विभाग और संघ लोक सेवा आयोग के सचिव को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील कुमार परिमल ने पीठ से कहा कि 15 अप्रैल 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों की पदोन्नति पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।
उसके बाद 22 जुलाई 2020 को डीओपीटी ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर अस्थायी रूप से पदोन्नति करने की इजाजत मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने इजाजत देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद डीओपीटी में 11 दिसंबर, 2020 को उप सचिव से लेकर निदेशक स्तर के 149 अधिकारियों का अस्थायी रूप से पदोन्नति का आदेश निकाला। इनमें से 55 आरक्षित वर्ग से थे, जो पूर्व में प्रमोशन में आरक्षण का फायदा ले चुके थे।
याचिका में दावा, पदोन्नति में तय प्रक्रिया का पालन नहीं
याचिका में दावा किया गया है है कि पदोन्नति करने का सरकार का यह आदेश एम नागराज और जरनैल सिंह मामले में संविधान पीठ द्वारा दिए गए फैसलों के विपरीत है। सरकार ने पदोन्नति करने में इन दोनों फैसलों में तय की गई प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। ऐसे में यह साफ है कि जानबूझकर न्यायालय के आदेश की अवमानना की गई है, लिहाजा इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करनी चाहिए और उन्हें दोषी ठहराया जाना चाहिए।
यह कहा था नागराज मामले में
मालूम हो कि वर्ष 2006 में नागराज मामले में और 2018 में जरनैल सिंह मामले में संविधान पीठ ने साफ तौर पर कहा था कि प्रमोशन में आरक्षण देने के मामले में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व को लेकर आंकड़ा जुटाया जाना चाहिए।