सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट कहा कि संसद में चर्चा जारी होने के कारण हम किसी मुद्दे से दूर नहीं हो सकते बल्कि यह सुनिश्चित करेंगे कि नागरिकों के अधिकार की रक्षा हो सके। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने यह टिप्पणी उन मसले पर सुनवाई के दौरान की जिसमें यह तय किया जाना है कि अदालत को न्यायिक कार्यवाही के तहत संसदीय समिति में भेजी गई रिपोर्ट पर गौर करना चाहिए या नहीं।
शीर्ष अदालत ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की दलील पर भी कड़ी प्रतिक्रिया जताई जिन्होंने संसदीय समिति की रिपोर्ट को न्यायिक जांच के दायरे में लाने का विरोध किया था। राष्ट्रीय राजमार्ग पर शराबबंदी का फैसला देने वाले न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने अटार्नी जनरल से कहा, ‘मुझे खेद है कि आपने मेरा जजमेंट नहीं पढ़ा।
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हम आपकी (केंद्र की) नीति लागू करते रहे है। केंद्र ने राजमार्गों से शराब की दुकानें हटाने के कई फैसले जारी किए हैं। भारत दुर्घटनाओं की राजधानी बनता जा रहा है। हमने शराब की दुकानें हटाने का आदेश आपकी नीति के मुताबिक ही दिया है। हमारा फैसला इस दिशा में स्पष्ट है। यदि संसदीय समिति की रिपोर्ट गर्भधारण खत्म करने को लेकर हो तो क्या हम अपनी आंखें बंद कर लें।’