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सुप्रीम कोर्ट: हायर एग्रीमेंट में वाहन पर नियंत्रण के साथ-साथ थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का भी होता है हस्तांतरण

Thu, 22 Jul 2021 04:19 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

  • पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलटा
  • तीसरे पक्ष को मुआवजा देने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी पर होगी
  • हाईकोर्ट के फैसले को राज्य परिवहन निगम ने सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती
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supreme court - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर परिवहन निगम एक करार के तहत किसी वाहन मालिक से वाहन हायर करता है तो वाहन पर नियंत्रण के साथ-साथ थर्ड पार्टी इंश्योरेंस भी ट्रांसफर होता है। अगर इसके बाद इस वाहन से कोई दुर्घटना हो जाए तो बीमा कंपनी पीड़ितों को मुआवजा देने की जवाबदेही से बच नहीं सकती।

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जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने यह कहते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है जिसमें कहा गया था कि तीसरे पक्ष को मुआवजा देने की जिम्मेदार बीमा कंपनी पर नहीं होगी क्योंकि वाहन का इस्तेमाल परिवहन निगम द्वारा किया जा रहा था न कि वाहन के वास्तविक मालिक द्वारा। हाईकोर्ट के फैसले को उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने परिवहन नियम की अपील को स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति के परिजनों को 1.82 लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का निर्देश दिया है। साथ ही क्लेम की तारीख से लेकर भुगतान की तारीख तक का छह फीसदी ब्याज भी अदा करने के लिए कहा है।
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मामले के मुताबिक, परिवहन निगम ने एक करार के तहत वाहन को हायर किया था। इसके तहत निगम को तय परमिट वाले रूट पर बस चलाना था। जिस अवधि के लिए तक के लिए करार हुआ था उस अवधि का बस मालिक ने वाहन का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस करवा रखा था।

इसी दौरान 25 अगस्त 1998 को बस से हुई दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई। पीड़ित परिवार की अर्जी पर मोटर वाहन दुर्घटना पंचाट ने बीमा कंपनी को मृतक के परिजनों को 1.82 लाख रुपये मुआवजा देने के।लिए कहा था।

पंचाट के आदेश को बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि बीमा कंपनी मुआवजा भुगतान के लिए जिम्मेदार नहीं है क्योंकि बस, निगम के द्वारा चलाई जा रही थी। जिसके बाद निगम ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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