फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकार को अनिश्चितकाल तक किसी की संपत्ति पर कब्जे की अनुमति देना अराजकता बढ़ाएगा: सुप्रीम कोर्ट

Wed, 25 Nov 2020 04:15 AM IST
देव कश्यप राजीव सिन्हा, नई दिल्ली
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि केंद्र या राज्य सरकार अनिश्चितकाल के लिए किसी व्यक्ति की संपत्ति पर कब्जा नहीं कर सकती क्योंकि संविधान के तहत आर्थिक स्वतंत्रता मूल्यवान अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र या राज्य सरकार द्वारा यह दावा करना कि उसके पास किसी व्यक्ति की संपत्ति पर अनिश्चितकाल के लिए कब्जा रखने का अधिकार है, यह अराजकता या अव्यवस्था से कम नहीं है।

विज्ञापन


जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एस रवींद्र भट्ट की पीठ ने ये बातें कर्नाटक हाईकोर्ट के एक फैसले को चुनौती देने वाली बीके रवीचंद्र और अन्य की याचिका स्वीकार करते हुए कही। हाईकोर्ट ने 2008 में अपीलकर्ताओं की उस मांग की ठुकरा दिया था कि केंद्र को रक्षा उद्देश्यों के लिए 1960 के दशक में अधिग्रहित बंगलूरू दक्षिण में उनकी चार एकड़ से अधिक जमीन खाली करने का निर्देश दिया जाए। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने अपीलकर्ताओं को राहत न देकर गलती की है।


मालिकों को कब्जा न देना अनुचित
पीठ ने कहा कि केंद्र का जमीन पर कानूनी कब्जे का अधिकार खत्म होने के 33 बर्ष बाद भी उस संपत्ति के मालिकों को कब्जे से दूर रखना अनुचित है। 33 वर्ष बहुत लंबा वक्त है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को तीन महीने के भीतर अपीलकर्ताओं को भूमि का कब्जा वापस देने का निर्देश दिया है। पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता उस भूमि की वैल्यू के हिसाब से मुआवजे का दावा करने के लिए स्वतंत्र हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार को वाद खर्च के तौर पर अपीलकर्ताओं को 75 हजार रुपये देने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि अदालतों की भूमिका लोगों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें