सुप्रीम कोर्ट ने 25 हफ्ते की गर्भवती को गर्भपात कराने की अनुमति देने की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि भ्रूण हत्या भी हत्या जैसा ही अपराध है। दरअसल मुंबई की 20 वर्षीय महिला वैवाहिक झगड़े के कारण तलाक के साथ-साथ गर्भपात भी कराना चाहती थी।
न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और संजय किसन कौल की पीठ ने महिला की वकील स्नेहा मुखर्जी से कहा कि अदालत में मां की जगह अजन्मे बच्चे का पक्ष रखा जाना चाहिए था।
जस्टिस जोसेफ ने कहा कि ‘आपको उस मां को शिशु की घड़कन सुनानी चाहिए।’ महिला ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें अदालत ने उसे 21 हफ्ते और तीन दिन के भ्रूण के गर्भपात की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। जस्टिस जोसेफ ने कहा यदि महिला का अपने पति के साथ फिर से मेलमिलाप हो जाता है, तो उसे अपने ‘शिशु की हत्या’ पर पछतावा होगा।
बताया जाता है कि घरेलू हिंसा की शिकार उस महिला का अपने पति से गंभीर विवाद था, इसलिए वह तलाक लेना चाहती थी और अपने करियर को आगे बढ़ाने चाहती थी। भारतीय कानून में 20 हफ्ते से ज्यादा के गर्भ को नष्ट करने की इजाजत नहीं है। एक ही सूरत में गर्भपात की अनुमति मिलती है, यदि मां की जिंदगी को खतरा हो या शिशु में किसी प्रकार की विकृति हो।