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SC ने सरकार पर की टिप्पणी ‘आप कुछ नहीं करते और कहते हैं अदालत चला रही है देश’

Sat, 22 Apr 2017 10:18 AM IST
amarujala.com- Submitted By: अभिषेक तिवारी
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सु्प्रीम कोर्ट - फोटो : SELF
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार खुद कुछ करना नहीं चाहती, ऐसे में अगर हम कोई निर्देश देते हैं तो कहा जाता है कि अदालत देश चला रही है। यह टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय पर एक लाख रुपये का जुर्माना किया है। वृंदावन सहित देश केअन्य शहरों में विभिन्न होम में रह रही विधवाओं के संरक्षण और पुनर्वास को लेकर केंद्र सरकार के रवैये पर आपत्ति जताते हुए न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘आखिर विधवाओं को लेकर आप गंभीर क्यों नहीं हैं। आपको विधवाओं की चिंता क्यों नहीं है।
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आप हलफनामा दायर कर कहिए कि आपको देश की विधवाओं से कोई लेना देना नहीं है। हमारे निर्देश केबावजूद आपने कुछ नहीं किया। ऐसा लगता है कि आप कुछ करना ही नहीं चाहते।’ वास्तव में गत छह अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय केअधिकारियों को नालसा समेत अन्य स्टेकहोल्डर के साथ बैठक पर इस मुुद्दे को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग की सिफारिशों पर विचार करने के लिए कहा गया था। मंत्रालय से कहा गया था कि वह विचार विमर्श कर यह तय करे कि विधवाओं के संरक्षण और उनकेहितों के मद्देनजर क्या निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

पीठ ने सभी को 10 अप्रैल तक यह बताने के लिए कहा कि किन दो-तीन मसलों पर फिलहाल निर्देश जारी किए जा सकते हैं। 10 अप्रैल को मंत्रालय ने पीठ को बताया कि इसे लेकर 12 और 13 अप्रैल तक बैठक होने वाली है। जिसके बाद सुनवाई 21 अप्रैल तक के लिए टाल दी गई थी। शुक्रवार को मंत्रालय की ओर से पेश हलफनामे में किसी तरह का सुझाव न होने पर पीठ ने कड़ी आपत्ति जताई।
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अपने हलफनामे में मंत्रालय ने सरकार द्वारा कई योजनाओं का जिक्र किया था। मंत्रालय ने बताया कि वह मुश्किल हालातों में रह रही महिलाओं के लिए गृह योजना की शुरुआत करने जा रही है। इस योजना के तहत विधवा और निस्सहाय महिलाएं भी शामिल होंगी। इसकेअलावा मंत्रालय ने सरकार द्वारा चलाई जा रही इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना, नेशनल ओल्ड एज पेंशन सहित कई योजनाओं का जिक्र किया, जिसकेतहत विधवाओं को लाभ देने की व्यवस्था है।

मंत्रालय के हलफनामे पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पीठ ने कहा कि आपने कहा था कि 12 और 13 अप्रैल को बैठक प्रस्तावित है लेकिन आपने बैठक नहीं की और अब स्पष्टीकरण दे रहे हैं। अदालत का सख्त रुख देते हुए मंत्रालय की ओर से पेश वकील ने पीठ से और वक्त मांगा। जिस पर पीठ ने मंत्रालय को जवाब देने के लिए चार हफ्ते का वक्त तो दे दिया लेकिन उसके रवैये पर एक लाख रुपये का जुर्माना कर दिया। अदालत पर्यावरण एवं उपभोक्ता संरक्षण फाउंडेशन द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। 
क्यों बिफरी अदालत-
दरअसल विधवाओं के कल्याण के लिए सरकार ने हलफनामा देकर कहा था कि मंत्रालय उनके लिए कई योजनाएं ला रहा है। लेकिन इस संबंध में मंत्रालय ने बैठक तक नहीं की। इस पर सुप्रीम कोर्ट बिफर गया और उसने सरकार की खिंचाई कर डाली। 
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