कई बार ऐसा देखा गया है कि नफरती भाषणों के कारण फैलने वाली छोटी घटना बड़ा रूप ले लेती है। आज का दौर तो सोशल मीडिया का है, जिस फर्जी खबरों की भरमार है, आए दिन नफरती बयान वायरल होते रहते हैं। इसका असर हमने हालिया दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के नूंह-गुरुग्राम में हिंसा के दौरान देखा। लेकिन अब नफरती भाषणों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। जिसमें शुक्रवार को कहा गया है कि "इस तरफ या उस तरफ" नफरत फैलाने वाले भाषण देने वाले सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न राज्यों में नफरत फैलाने वाले भाषणों पर अंकुश लगाने के निर्देश देने की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिका में हिंदू संगठनों पर प्रतिबंध लगाने को लेकर भी कहा गया है। एक वकील ने पीठ के समक्ष दावा किया कि केरल की एक राजनीतिक पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने जुलाई में राज्य में एक रैली आयोजित की थी जहां "हिंदुओं की मौत" जैसे नारे लगाए गए थे।
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम बहुत स्पष्ट हैं। इस तरफ या उस तरफ, उनके साथ एक जैसा व्यवहार किया जाना चाहिए और कानून अपना काम करेगा। अगर कोई किसी ऐसी चीज में शामिल होता है जिसे हम नफरती भाषण के रूप में जानते हैं, तो उनसे कानून के अनुसार निपटा जाएगा। यह है कुछ ऐसा जिस पर हम पहले ही अपनी राय व्यक्त कर चुके हैं।
न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि समय की कमी के कारण पीठ आज मामले पर आगे सुनवाई नहीं कर पाएगी क्योंकि उसने पहले ही बिहार जाति सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाएं सूचीबद्ध कर रखी हैं। अदालत ने कहा, नफरत फैलाने वाले भाषण के सभी मामलों की सुनवाई अगले शुक्रवार को की जाएगी।
न्यायमूर्ति खन्ना ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा कि मैंने तहसीन पूनावाला के मामले में 2018 के फैसले और इस अदालत द्वारा जारी दिशानिर्देशों को पढ़ा है। मुझे उम्मीद है कि दिशानिर्देशों का सख्ती से अनुपालन किया जा रहा है। प्रमुख याचिकाकर्ताओं में से एक शाहीन अब्दुल्ला का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील निजाम पाशा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नफरत का कोई पक्ष नहीं है।
शीर्ष अदालत ने हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों में रैलियों में एक विशेष समुदाय के सदस्यों की हत्या और उनके सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार का आह्वान करने वाले कथित घृणास्पद भाषणों पर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की थी। इसने नटराज से निर्देश लेने और प्रस्तावित समिति के बारे में सूचित करने को कहा था।