सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रेलवे को निर्देश दिया है कि वह ट्रेन से चढ़ते और उतरते समय होने वाली यात्रियों की मौत पर मुआवजा दे। बुधवार को कोर्ट ने कहा कि ट्रेन में चढ़ते और उतरते समय यात्रियों की मौत होने या फिर उन्हें चोट लगने पर उन्हें मुआवजा देना पड़ेगा। कोर्ट ने हालांकि यात्रियों की लापरवाही से भी इंकार नहीं किया है। जस्टिस एके गोयल और आरएफ नरीमन की बेंच ने ट्रेन पर चढ़ते और उतरते समय होने वाली मौत और चोट को अवांछित घटना करार दिया है।
भारतीय रेलवे की धारा 124ए के अनुसार रेल प्रशासन द्वारा उन स्थितियों में कोई मुआवजा नहीं दिया जाता है जिसमें यात्री आत्महत्या, आत्महत्या का प्रयास, जानबूझकर चोट लगाना, अपने आपे में ना रहते हुए किया गया आपराधिक कृत्य करता है। इस मामले पर विभिन्न हाईकोर्ट ने विरोधाभासी
फैसले दिए हैं। जिसमें ट्रेन में चढ़ते और उतरते समय पीड़ित की लापरवाही की वजह से मौत या गंभीर चोटें लगी है। इसे जानबूझकर चोट लगाना माना गया था। हालांकि कुछ हाईकोर्ट ने इस तरह की घटनाओं के लिए रेलवे पर सख्त जवाबदेही के सिद्धांतों को भी लागू किया था।
इस मसले पर विराम लगाते हुए
सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को इस तरह की घटनाओं में पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार माना है। फिर चाहे ऐसे मामले में पीड़ित की गलती हो या ना हो। कोर्ट ने इस तरह की अवांछनीय दुर्घटनाओं को रेल प्रशासन की गलती और लापरवाही माना है। कोर्ट का कहना है कि खुद को जानबूझकर नुकसान पहुंचाना यात्री की गलती और लापरवाही होती है और इस आधार पर रेलवे यात्री को मुआवजा देने से बच सकता है।