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लोया केस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हमें किसी प्रमाण की जरूरत नहीं

Fri, 09 Mar 2018 01:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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सीबीआई जज बीएच लोया
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्याय हमारे हृदय और हमारी अंतरात्मा में है। इसके लिए हमें किसी वकील (बहस करने वाले) से प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को यह टिप्पणी की, जब उनसे वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि, 'आखिर जज लोया केस में मौत की परिस्थितियों पर संदेह उठाए जाने के बाद पीठ की ओर से सफाई क्यों दी जाती है।' 
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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ जज लोया की मौत की निष्पक्ष जांच वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है।

इसी दौरान याचिकाकर्ता संगठन बांबे लॉयर्स एसोसिएशन के वकील दवे ने आपत्ति जताई कि आखिर पीठ यह क्यों बता रही है कि जय लोया को अस्पताल ले जाने के लिए चीफ जस्टिस की कार या बांबे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की कार का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया।

इस पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, ‘हम वकील से वह सवाल जरूर पूछेंगे, जो हम जानना चाहते हैं। हम वकीलों की सलाह पर नहीं चलेंगे। न्याय हमारे हृदय और हमारी अंतरात्मा में हैं। हमें इसके लिए किसी वकील के प्रमाणपत्र की दरकार नहीं है।’
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सुनंदा पुष्कर मामले से तुलना करने पर आपत्ति

सीबीआई जज बीएच लोया
बांबे लॉयर्स एसोसिएशन के वकील दुष्यंत दवे ने जब जज लोया की तुलना सुनंदा पुष्कर मामले से की तो पीठ ने इस पर आपत्ति जताई। दवे ने सवाल किया कि आखिर जय लोया मामले में नोटिस क्यों नहीं जारी किया गया जबकि सुनंदा पुष्कर मामले में दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया गया।

इस पर न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर ने कहा कि हम हर चीज अपने आदेश में दर्ज नहीं कर सकते। चूंकि दिल्ली पुलिस ने तय तारीख तक दिल्ली हाईकोर्ट में रिपोर्ट नहीं दायर की थी, इसलिए हमने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है।

मालूम हो कि न्यायमूर्ति खानविल्कर उस पीठ के सदस्य भी हैं जिन्होंने सुनंदा पुष्कर मामले में दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था।
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