नाबालिग के खिलाफ यौन अपराध मामले को बंद करने की जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले पर जांच करने की सहमति जताई, जिसमें नाबालिग से छेड़छाड़ के बाद प्रतिद्वंद्वी पक्षों के बीच समझौता होने के बाद केस को रद्द कर दिया गया था। सीजेआई यूयू ललित और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने मामले से निपटने के लिए मदद के तौर पर वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत को न्याय मित्र नियुक्त किया है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में गंगापुर के निवासी रामजीलाल बैरवा ने हाईकोर्ट द्वारा एक गंभीर आपराधिक मामले को बंद करने के फैसले के खिलाफ जनहित याचिका दायर की। इसमें बताया गया कि पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया। पीठ ने राजस्थान सरकार और डीजीपी को नोटिस जारी किया। मामले में 31 अक्तूबर तक सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
यह था मामला
6 जनवरी को स्कूल में 15 साल की छात्रा के शील को कथित तौर पर अपमानित किया गया था। पिता ने केस दर्ज कराया, लेकिन पुलिस ने प्राथमिकी में आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। इसके बाद दोनों के बीच कथित समझौता किया गया था। हाईकोर्ट ने पेश समझौते को ध्यान में रखते हुए आरोपी द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करके कार्यवाही को रद्द कर दिया था।