सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि भारत के चीफ जस्टिस को यह अधिकार है कि वह केसों का आवंटन कर सकें और उसके लिए बेंच निर्धारित कर सकें। कोर्ट ने एडवोकेट अशोक पांडे द्वारा दायर की गई याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केसों के आवंटन के समय सीजेआई दो वरिष्ठ जजों से परामर्श लेते हैं।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएम खानविलकर की पीठ ने यह याचिका खारिज की। याचिका में कहा गया था कि सीजेआई को शीर्ष अदालत के दो सीनियर जजों के साथ कोर्ट नंबर एक में बैठना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि
CJI को यह विशेेषाधिकार है कि वह केसों का बंटवारा कर सके और बेंचों का गठन कर सके। चीफ जस्टिस एक संवैधानिक पद है इसलिए उनके अधिकारों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।
आपको बता दें कि
सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके CJI पर यह आरोप लगाया था कि वह महत्वपूर्ण मामले जूनियर जजों को सौंप रहे हैं। चारों जजों ने CJI के काम और केसों के बंटवारे पर भी सवाल उठाया था।