धोखे से रूस भेजे गए भारतीयों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कई अहम निर्देश दिए। विदेश मंत्रालय में नोडल अधिकारी नियुक्त होगा, डीएनए मिलान, मुआवजा और पार्थिव शरीर की वापसी में भी परिवारों को मदद मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा है? जानिए...
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान नौकरी का झांसा देकर रूस भेजे गए और बाद में युद्ध के मोर्चे पर पहुंचा दिए गए भारतीय नागरिकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को अहम निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि विदेश मंत्रालय तुरंत एक नोडल अधिकारी नियुक्त करे, जो युद्ध में मारे गए, घायल हुए या अब भी लापता भारतीयों के परिवारों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखे और उन्हें हर जरूरी जानकारी व सहायता उपलब्ध कराए।
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प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि पीड़ित परिवार पहले ही भारी मानसिक और आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि उन्हें समय पर सही जानकारी और हर संभव मदद मिले।
सुप्रीम कोर्ट के पांच बड़े निर्देश
विदेश मंत्रालय में एक समर्पित नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो पीड़ित परिवारों से सीधे संपर्क में रहेगा।
युद्ध में मारे गए भारतीयों की पहचान के लिए डीएनए सैंपल का मिलान कराया जाएगा।
नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास के समक्ष मुआवजा क्लेम दाखिल कराने में विदेश मंत्रालय परिवारों की मदद करेगा।
पीड़ित परिवारों को सभी जरूरी जानकारी और प्रक्रियाएं उनकी मातृभाषा या स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराई जाएंगी।
राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण और राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण परिवारों को मुफ्त कानूनी सहायता देंगे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला उन भारतीय युवाओं से जुड़ा है, जिन्हें ट्रैवल एजेंटों ने रूस में अच्छी नौकरी का लालच देकर भेजा था। परिवारों का आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद कई युवाओं को उनकी इच्छा के खिलाफ रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया गया। इस दौरान कई भारतीयों की मौत हो गई, कुछ घायल हुए और कई अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इन्हीं परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सरकार से अपील की थी कि उनके परिजनों का पता लगाया जाए, मृतकों के पार्थिव शरीर भारत लाए जाएं और रूसी सरकार से उचित मुआवजा दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
पीड़ित परिवारों को कैसे मिलेगी मदद?
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) और राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि वे पीड़ित परिवारों की हर कानूनी प्रक्रिया में मदद करें। इसमें मुआवजा क्लेम दाखिल करना, जरूरी दस्तावेज तैयार करना, कागजी कार्रवाई पूरी कराना और पार्थिव शरीर की स्वदेश वापसी से जुड़ी औपचारिकताओं में सहायता शामिल है। अदालत ने कहा कि परिवारों को अनावश्यक कानूनी और प्रशासनिक परेशानियों का सामना नहीं करना चाहिए।