Mninistry Of Home Affairs: गृह मंत्रालय ने आदेश जारी किया है कि अब सहायक कमांडेंट (एसटीएस) और प्रतिनियुक्ति पर तैनात आईपीएस अधिकारियों के पदों को भी नॉन-फंक्शनल सेलेक्शन ग्रेड की गणना में शामिल किया जाएगा। अभी तक ये पद एनएफएसजी की गणना से बाहर थे। हालांकि ये फायदा सिर्फ उन्हीं अफसरों को मिलेगा, जिन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला...
दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा 26 फरवरी 2024 को रिट याचिका संख्या WP(C) 3445/2020 _(निगुडे अशोक दशरथ एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य) के अनुपालन में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अर्धसैनिक बलों सीएपीएफ में नॉन-फंक्शनल सेलेक्शन ग्रेड (एनएफएसजी) लागू करने को लेकर अहम आदेश जारी किया है। सीआरपीएफ के 17 कैडर अफसरों को दिल्ली हाईकोर्ट में मिली जीत के बाद गृह मंत्रालय का यह आदेश आया है। इसमें कहा गया है कि अब सहायक कमांडेंट (एसटीएस) और प्रतिनियुक्ति पर तैनात आईपीएस अधिकारियों के पदों को 'नॉन-फंक्शनल सेलेक्शन ग्रेड' की गणना में शामिल किया जाएगा। मंत्रालय की ओर से फिलहाल यह फायदा केवल याचिकाकर्ताओं को ही देने की बात कही गई है।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
सीआरपीएफ के 17 ग्रुप ए कैडर अफसरों की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि एनएफएसजी प्रदान करने के लिए रिक्तियों/पदों की गणना करते समय सरकार ने गलत तरीके से सहायक कमांडेंट (एसटीएस) और प्रतिनियुक्ति पर तैनात आईपीएस द्वारा धारित पदों को बाहर रखा था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को निर्देश दिया कि इन पदों को शामिल करके एनएफएसजी की पुनर्गणना की जाए।
गृह मंत्रालय ने सभी सीएपीएफ 'सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी को निर्देश दिया है कि एनएफएसजी की गणना में सहायक कमांडेंट (एसटीएस) और प्रतिनियुक्ति पर आए आईपीएस अधिकारी के पदों को भी शामिल किया जाए। एनएफएसजी केवल उन अधिकारियों को दी जाए, जो बाकी पात्रता की शर्तें पूरी करते हों।
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गृह मंत्रालय ने आदेश में क्या कहा?
गृह मंत्रालय ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है कि उक्त मुकदमे में याचिकाकर्ताओं/आवेदकों को न्यायालय के आदेश के अनुसार एनएफएसजी का लाभ दिया जाएगा। यह आदेश, जारी होने की तिथि 28 जुलाई 2026 से लागू होगा। यहां पर खास बात ये है कि केवल वही अधिकारी इसका लाभ ले पाएंगे, जिन्होंने यह मुकदमा दायर किया था। जो अधिकारी याचिकाकर्ता नहीं थे, वे इस आदेश से स्वतः कवर नहीं होंगे। यदि वे समान लाभ चाहते हैं तो उन्हें अलग से कानूनी राहत या व्यापक नीतिगत निर्णय की आवश्यकता होगी।