सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए कहा कि विदेशी लॉ फर्मों को भारत में ऑफिस खोलने और अदालतों में प्रैक्टिस करने की इजाजत नहीं है, लेकिन वे यहां अपने क्लाइंट को विदेशी कानून के बारे में सलाह देने के लिए अस्थायी तौर पर आ सकते हैं। इसके अलावा उन्हें अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन के मामलों में भी यहां आने की अनुमति होगी।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यूयू ललित की खंडपीठ ने विदेशी लॉ फर्मों के मामले में सुनवाई करते हुए उनकी गतिविधियों को संचालित करने को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को नियम बनाने का भी निर्देश दिया।
पीठ ने इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट के 21 फरवरी 2012 के फैसले को कुछ बदलावों के साथ बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने एके बालाजी बनाम बीसीआई एवं अन्य के मामले में फैसला दिया था कि विदेशी लॉ फर्में अस्थायी तौर पर यहां अपने क्लाइंटों को विदेशी कानून के बारे में सलाह दे सकती हैं।
शीर्ष अदालत ने कहा कि विदेशी वकील यहां अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन में भाग लेने आ सकते हैं लेकिन उन पर प्रैक्टिस करने के संबंध में बीसीआई के नियम लागू होंगे। उन्हें आर्बिट्रेशन के नियमों का भी पालन करना होगा। पीठ ने एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के उस नियम को भी बदल दिया जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन में विदेशी वकीलों को प्रैक्टिस करने पर रोक लगाई गई थी।