रोहतगी ने कहा के अगर ऐसा है तो वे फिल्म देखे बगैर भी आनंद उठा सकते हैं। रोहतगी के इन दलीलों से पीठ प्रथम दृष्टया वाजिब महसूस करते हुए जम्मू एवं कश्मीर हाईकोर्ट के इस आदेश पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता रहे दो वकीलों को नोटिस जारी करते हुए चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
सुनवाई के दारौन पीठ ने उस वाक्या का भी जिक्र किया जब एक विमानन कंपनी ने यात्रियों को अपना भोजन-पानी साथ रखने पर पाबंदी लगा दी थी। न्यायमूर्ति रोहिंग्टन ने यह जानना चाहा कि क्या ऐसा कोई वैधानिक नियम है जो इस पर पाबंदी लगाता हो।
जवाब में रोहतगी ने कहा कि ये सिनेमाघर हैं। लिहाजा नियम फिल्म को लेकर है न कि खाने-पीने को लेकर। उन्होंने कहा कि कोई नियम न होने का यह कतई मतलब नहीं है कि लोग कुछ भी लेकर सिनेमाघर जाए।
रोहतगी ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने आदेश देते वक्त सुरक्षा के पहलुओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने कहा कि सिनेमाघरों में कई बार धमाके हो चुके हैं। चंद मिनटों में सिनेमाघरों में प्रवेश करने वाले सैकड़ों लोगों की सघनता से जांच नहीं की जा सकती।
इसके अलावा एसोसिएशन की ओर से पेश दूसरे वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि टिकटों पर स्पष्ट तौर पर लिखा होता है कि दर्शक क्या लेकर सिनेमाघरों में नहीं प्रवेश कर सकते।