सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कर्नाटक के कांग्रेस व जेडीएस के 17 बागी विधायकों की उन याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया जिनमें कर्नाटक विधानसभा के पूर्व स्पीकर द्वारा अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी।
जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कांग्रेस-जेडीएस की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, राजीव धवन, देवदत्त कामत व अन्य और बागी विधायकों की ओर से पेश मुकुल रोहतगी, सीएस सुंदरम, वी गिरी सहित अन्य द्वारा पेश की गई दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
विधानसभा के मौजूदा स्पीकर की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ के समक्ष पूर्व विधानसभा स्पीकर द्वारा विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के निर्णय पर पुनर्विचार करने का प्रस्ताव दिया। पूर्व स्पीकर ने गलत तरीके से विधायकों के इस्तीफे को अस्वीकार कर दिया और विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया।
वहीं बागी विधायकों की ओर से कहा गया कि पूर्व स्पीकर ने इस बात का परीक्षण नहीं किया कि विधायक स्वेच्छा से बिना किसी बाहरी दबाव के इस्तीफा दे रहे हैं। स्पीकर ने इन सभी को अयोग्य घोषित करार दिया।
जेडीएस की ओर पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि स्पीकर को इस्तीफे की पेशकश पर गहराई से परीक्षण करना होता है। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है, अब तक किसी अदालत ने इस मसले पर परीक्षण नहीं किया। उन्होंने इस मामले को संविधान पीठ के पास भेजने की अपील की।