उच्चतम न्यायालय ने गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री हरेन पांड्या की हत्या के मामले की अदालत की निगरानी में नए सिरे जांच कराने संबंधी जनहित याचिका पर मंगलवार को अपना फैसला सुरक्षित रखा। एनजीओ सीपीआईएल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील शांति भूषण और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की बहस पूरी हो जाने के बाद न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रखा।
भूषण ने दलील दी कि हत्या मामले में हाल में कई नए तथ्य सामने आए हैं जिनकी नए सिरे से जांच किए जाने की आवश्यकता है। सॉलिसिटर जनरल ने आरोप लगाया कि एनजीओ राजनीतिक बदला लेने के लिए जनहित याचिका अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग कर रहा है। गुजरात में नरेन्द्र मोदी सरकार में गृह मंत्री रहे हरेन पांड्या की 26 मार्च, 2003 को अहमदाबाद में लॉ गार्डन इलाके में उस समय गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी जब वह सुबह की सैर कर रहे थे।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने हरेन पांड्या हत्या मामले में नई जांच के लिए दायर याचिका पर 11 फरवरी को सुनवाई करने को कहा था। कुछ नए तथ्य सामने आने के बाद एक एनजीओ ने इस मामले की दोबारा जांच की गुहार लगाई है। न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने कहा था कि इस मामले में अन्य पीठ में पहले से ही अपील पर सुनवाई चल रही है। पीठ ने कहा कि यह उचित होगा कि वही पीठ इस याचिका की भी सुनवाई करे।
इस मामले में सभी आरोपियों को गुजरात हाईकोर्ट द्वारा बरी करने के फैसले के खिलाफ सीबीआई की अपील पर न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने 31 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। याचिकाकर्ता एनजीओ सीपीआईएल के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि ट्रायल के बाद चार नए तथ्य सामने आए हैं, इसलिए इस मामले की दोबारा जांच होनी चाहिए।