सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के दो महिला न्यायिक अधिकारियों की बर्खास्तगी से संबंधित मामले में मंगलवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने बर्खास्त महिला न्यायिक अधिकारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह और आर बसंत के अलावा न्यायमित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल की दलीलें सुनीं। यह देखते हुए कि न्यायाधीशों को एक संन्यासी की तरह जीवन जीना पड़ता है और कर्मठशील होकर काम करना पड़ता है, शीर्ष अदालत ने पहले कहा था कि उन्हें सोशल मीडिया का उपयोग करने से बचना चाहिए और निर्णयों के बारे में कोई राय व्यक्त नहीं करनी चाहिए।