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MTP Act: सुप्रीम कोर्ट ने एमटीपी कानून पर अपना फैसला सुरक्षित रखा; कहा- प्रावधानों को दुरुस्त करने की जरूरत

Tue, 23 Aug 2022 09:35 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि एमटीपी नियमों में प्रावधानों को "दुरुस्त" करने की आवश्यकता है और वह उन महिलाओं की एक अन्य श्रेणी को शामिल करना चाहेगा।
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दिल्ली में लॉकडाउन लगाने की सलाह को एफिडेविट दाखिल। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह गर्भ का चिकित्सकीय समापन (एमटीपी) कानून और इससे संबंधित नियमों की व्याख्या करेगा ताकि विवाहित और अविवाहित महिलाओं के बीच के भेदभाव को दूर किया जा सके तथा 24 सप्ताह तक के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दी जा सके।
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उच्चतम न्यायालय ने कहा कि एमटीपी नियमों में प्रावधानों को "दुरुस्त" करने की आवश्यकता है और वह उन महिलाओं की एक अन्य श्रेणी को शामिल करना चाहेगा।

न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना की पीठ ने कहा कि वह एमटीपी कानून की व्याख्या के मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख रही है और इसमें 'अविवाहित महिला' या "एकल महिला" को शामिल किया जाएगा ताकि उन्हें 24 सप्ताह तक के गर्भ को समाप्त करने का लाभ मिल सके।

केंद्र ने न्यायालय से कहा कि अगर संसद द्वारा पारित कानून में कोई अंतर नहीं है और अगर न्यायालय हस्तक्षेप करने को तैयार है, तो उसे एमटीपी नियम, 2003 में ऐसा करना चाहिए।
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केंद्र की ओर से पेश और इस मुद्दे पर अदालत की सहायता कर रहीं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि एमटीपी (संशोधन) अधिनियम 2021 के तहत कोई अंतर नहीं है और अधिनियम के तहत संबंधित नियमों में वर्गीकरण किया गया है।

उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर विशेषज्ञों के अपने विचार हैं और उनके अनुसार भ्रूण के लिंग निर्धारण के कारण गर्भधारण-पूर्व और प्रसव-पूर्व निदान तकनीक (पीसी-पीएनडीटी) कानून सहित विभिन्न कानूनों के दुरुपयोग से बचने के लिए वर्गीकरण किया गया है।

न्यायालय ने कहा, "एक बात, हमें स्पष्ट कर देना चाहिए कि हम अपने फैसले का मसौदा इस तरह से तैयार करने जा रहे हैं कि हम पीसी-पीएनडीटी कानून के प्रावधानों को कमजोर नहीं करने जा रहे हैं।"

इससे पहले पांच अगस्त को न्यायालय ने कहा था कि वह एमटीपी कानून तथा संबंधित नियमों की व्याख्या करेगा, ताकि यह तय किया जा सके कि क्या चिकित्सा सलाह पर अविवाहित महिलाओं को भी 24 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दी जा सकती है या नहीं।

न्यायालय ने कहा था, 'यदि कानून के तहत अपवाद मौजूद हैं तो चिकित्सा सलाह पर 24 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने वाली महिलाओं में अविवाहित महिलाओं को क्यों नहीं शामिल किया जाए? (कानून में) ‘पति’ के स्थान पर ‘पार्टनर’ शब्द रखने से ही संसद का इरादा स्पष्ट समझ में आता है। यह दर्शाता है कि उसने अविवाहित महिलाओं को उसी श्रेणी में रखा है जिस श्रेणी की महिलाओं को 24 हफ्ते के गर्भ को गिराने की अनुमति है।'
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