ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट करने वाले अशोका विवि के सहायक प्रोफेसर अली खान को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपने सस्ती लोकप्रियता पाने की कोशिश की है। सुप्रीम कोर्ट ने अली खान को अंतरिम जमानत देते हुए जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
हरियाणा के अशोका विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर और राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख अली खान महमूदाबाद ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की मीडिया ब्रीफिंग को दिखावा बताया था। हरियाणा राज्य महिला आयोग ने की अध्यक्ष रेणु भाटिया ने अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अली के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। प्रोफेसर अली खान ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
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सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिसार सिंह की पीठ ने कहा कि प्रोफेसर ने सस्ती लोकप्रियता पाने की कोशिश की। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हर किसी को अपनी बात कहने का अधिकार है। लेकिन क्या अब इतनी सांप्रदायिकता पर बात करने का समय आ गया है? देश ने बड़ी चुनौती का सामना किया है। राक्षस आए और हमारे मासूमों पर हमला किया। हम एकजुट रहे। लेकिन इस मौके पर सस्ती लोकप्रियता क्यों हासिल की जाए?
पीठ ने कहा कि हर कोई अधिकारों की बात करता है। ऐसा लगता है कि देश 75 साल से अधिकारों का वितरण कर रहा है। इसे हम कानून में डॉग व्हिसलिंग कहते हैं। राय देना अपमानजनक नहीं है। लेकिन राय देते वक्त आप शब्दों का चयन दूसरों को अपमानित करने के लिए करते हैं तो विद्वान प्रोफेसर के पास शब्दकोश में शब्दों की कमी नहीं हो सकती।
जांच पर रोक लगाने से इनकार
कोर्ट ने प्रोफेसर की टिप्पणी के खिलाफ चल रही जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने अली खान महमूदाबाद को निर्देश दिया है कि वे दोनों पोस्ट से संबंधित कोई भी ऑनलाइन लेख नहीं लिखेंगे या कोई भी ऑनलाइन भाषण नहीं देंगे। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें भारतीय धरती पर आतंकवादी हमलों या हमारे राष्ट्र द्वारा दी गई जवाबी प्रतिक्रिया के बारे में कोई भी टिप्पणी करने से रोक दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा।
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मानवाधिकार आयोग ने लिया स्वत: संज्ञान
अशोका विवि के सहायक प्रोफेसर अली खान की गिरफ्तारी और हिरासत में भेजे जाने का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने कहा कि जिन आरोपों के आधार पर उनको गिरफ्तार किया गया, उससे पता चलता है कि खान के मानवाधिकारों और स्वतंत्रता का उल्लंघन किया गया। आयोग ने हरियाणा के डीजीपी को नोटिस जारी करके एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।