सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के मुंबई बम धमाकों के दोषी रियाज अहमद सिद्दीकी की जमानत याचिका खारिज कर दी। सिद्दीकी को बम धमाके के आरोप में 10 साल की सजा मिलने के अलावा 1995 में बिल्डर प्रदीप जैन से रंगदारी मांगने और हत्या के आरोप में भी उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में जमानत याचिका खारिज करने का निर्णय लिया।
फिलहाल पुणे की यरवदा जेल में बंद 67 वर्षीय रियाज ने अपने वकीलों संजय मणि त्रिपाठी और अनु गुप्ता के जरिये शीर्ष अदालत में जमानत याचिका दाखिल की थी। याचिका में उसने खुद को कोविड-19 पॉजिटिव बताते हुए अस्पताल में इलाज चलने की बात कही थी। रियाज ने अस्पताल के इलाज से खुद को असंतुष्ट बताते हुए जमानत पर दूसरे अस्पताल में इलाज कराने की इजाजत मांगी थी।
जस्टिस रमना के अतिरिक्त जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस सूर्यकांत की मौजूदगी वाली पीठ ने सोमवार को रियाज की याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने जमानत देने का कोई पुख्ता कारण नहीं होने की बात कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया।